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जिला परिषद में 564 ठेकेदार रजिस्टर्ड सिर्फ चहेतों को ही दिया जाता है काम

3 वर्ष पहले
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डीबी स्टार बोकारो

बोकारो जिला परिषद में निबंधित संवेदकों की संख्या कुल 564 है, लेकिन 10 से 12 ही संवेदकों को बार-बार काम दिया जाता है। ऐसे में गांव की सरकार के हाथ में अधिकार देने का सरकार का सपना आखिरकार किस तरह पूरा होगा। जहां कुछ चुनिंदा और रसूखदार ठीकेदारों को ही कार्य में प्राथमिकता दी जाती है। उल्लेखनीय यह है कि काम लेने वालों में कुछ चुने हुए लोकसेवक भी शामिल हैं। इन लोकसेवकों की ठीकेदारी से एक ओर जहां सरकारी राशि का दुरूपयोग होता है, वहीं गुणवत्ता की जांच करने वाले सक्षम पदाधिकारी इन्हीं के नियंत्रण में होने के कारण या उनकी पहुंच उपर तक होने की वजह से गड़बड़ियों की जांच या उजागर नहीं कर पाते हैं। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है। चूंकि जनहित में किए गए कार्य की गुणवत्ता सही नहीं होने के कारण जनता जनप्रतिनिधि से शिकायत करते हैं।

यही है बोकारो जिला परषिद कार्यालय।

क्षमता विकास मद से

20514800 का काम

वर्ष 2016-17 और वर्ष 2017-18 में जिला परिषद की ओर से कई काम करवाए गए। जिसमें से 2016-17 में क्षमता विकास मद से 20514800 रुपए, बीआरजीएफ मद से 375000 रुपए, क्षमता विकास मद से 10614200, 13 वें वित्त आयोग मद से स्वीकृत योजना का कार्य 3230500, आरजीपीएस मद से एक करोड़, अनाबद्ध निधि से 9680400, 13 वें वित आयोग मद से 576300, बीआरजीएफ मद से 9635335 और आरजीपीएस मद से एक करोड़ रुपए का काम हुआ। वहीं 2017-18 में बीआरजीएफ मद से 11782050, बीआरजीपीएफ मद से ही 52555050, क्षमता विकास मद से 6332771, 13 वें वित आयोग मद से 733500, बीआरजीएफ मद से 3136200, 13 वें वित आयोग मद से 1570000, क्षमता विकास मद से 3614600 रुपए का काम हुआ।

इन्हें दिया गया काम

दो सालों में एएन कंस्ट्रक्शन, मथुरा इंटरप्राइेज, बीडीएमएस, घनश्याम यादव, कुलेश्वर यादव, डिस्प्लेस कंस्ट्रक्शन, आदर्श राज कंस्ट्रक्शन, मगध कंस्ट्रक्शन, अभिषेक इंटरप्राइजेज, चंद्रिका यादव, असरुद्दीन अंसारी, अशोक कुमार महथा, धनेश्वर मुर्मू, मां अंबे इंटरप्राइजेज, रामपद रविदास, मेसर्स आनंद इंटरप्राइजेज, आशीष इंटरप्राइजेज, टीआर कंस्ट्रक्शन, मारेहारा कंस्ट्रक्शन सहित कुछ अन्य चहेते ठेकेदारों को काम दिया गया।

दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

अगर ऐसी बात है, तो सबसे पहले पूरे मामले की बारीकी से जांच कराई जाएगी। इसमें दोषियों को चिह्नित कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

रवि रंजन मिश्रा, डीडीसी, बोकारो।

पहुंच और पैरवी वालों को मिलता है काम

जिला परिषद में पहुंच-पैरवी का कल्चर हावी है। कुछ चुनिंदा लोगों को ही काम मिलता है। यह खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता दीवान इंद्रनील सिन्हा की ओर से मांगी गई जानकारी में हुआ। पिछले दो सालों का ब्योरे को देखने से यह पता चलता है कि कुछ संवदेक पहुंच-पैरवी के बल पर काम ले लेते हैं। इससे संविधान की धारा 21 के तहत उन संवेदकों के अधिकार का हनन हो रहा है, जिन्हें रोजगार पाने का हक है।

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