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सवा करोड़ की सड़क सवा माह में ही टूटने लगी कमीशन के चक्कर में घटिया सामग्री का उपयोग

3 वर्ष पहले
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सुभाष वर्णवाल चंद्रपुरा

सवा करोड़ की लागत से रटारी से चंद्रपुरा रेलवे स्टेशन फाटक तक बनी सड़क सवा माह में ही उखड़ने लगी है। राज्य संपोषित योजना के तहत बनी इस पीसीसी सड़क का नामकरण पंडित दीनदयाल उपाध्याय पथ किया गया है। लेकिन, नाम के अनुरूप इसमें कुछ भी नहीं है। अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण कार्य में जमकर अनियमितता बरती गई है। सड़क का उद्घाटन 11 मार्च 2018 को गिरिडीह सांसद रवींद्र कुमार पांडेय ने किया था। लेकिन उसके कुछ दिन बाद ही कई जगह सड़क में दरारें आ गईं। कई जगह तो यह टूट गई है। चंद्रपुरा रेलवे फाटक से कुछ दूरी पर पुलिया के पास सड़क काफी जर्जर हो गई। गिट्टी व बड़े-बड़े बोल्डर बाहर आ गए हैं। वहीं रेलवे फाटक के एक किमी दूर पीसीसी पथ के बीच दरारें आ गई हैं। इससे वहां दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।

बेरमो विधायक योगेश्वर महतो बाटुल ने 2015 में इस सड़क का शिलान्यास किया था। जमीन विवाद के कारण डेढ़ साल बाद निर्माण कार्य चालू हुआ। लेकिन निर्माण कार्य शुरू होने के बाद रेलवे ने एनओसी को लेकर कार्य बंद करा दिया। बाद में सांसद रवींद्र कुमार पांडेय के प्रयास से रेलवे ने एनओसी दे दिया। विवाद और रुकावटों के कारण सड़क बनाने में लंबा समय लग गया।

इस तरह कई स्थानों पर उखड़ने लगी है सड़क।

कई जगहाें पर बीच सड़क में आ गई हैं दरारें।

कमाई के लिए ठेकेदार ने जैसे-तैसे बना दी सड़क

चंद्रपुरा रेलवे फाटक से हीरक रोड रटारी मुख्य सड़क को जोड़ने के लिए सरकार ने आरईओ के तहत इस सड़क को पास किया था। लेकिन शुरू से अंत तक सड़क भ्रष्‍टाचार की भेंट चढ़ गई। ठेकेदार ने जहां अपनी कमाई पर ध्यान दिया, वहीं अधिकारियों ने कमीशन का। इसकी वजह से निर्माण में जमकर घटिया सामग्री का उपयोग हुआ। निर्माण कार्य में इस कदर भ्रष्टाचार हुआ कि सड़क का लाभ जनता को ठीक से मिल भी नहीं पाया कि यह टूटने लगी। ठेकेदार अपनी कमाई के लिए जैसे-तैसे काम पूरा दिखा देते हैं और अधिकारी सबकुछ देखते हुए भी बिल का भुगतान कर देते हैं। प्रखंड की अधिकतर सड़कों का यही हाल है। लोगों की शिकायत पर अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते है। वहीं, जनता का सेवक होने का दावा करने वाले जनप्रतिनिधि एक-दूसरे पर छींटाकशी तो करते हैं लेकिन जन मुद्दों पर उनका भी ध्यान नहीं रहता।

क्या कहता है ठेकेदार

सड़क उखड़ रही तो कोई बात नहीं, यह हमारी जिम्मेवारी है। जहां-जहां सड़क टूट गई है या उसमें दरारें आ गई हैं, वहां उसकी मरम्मत करा देंगे। इसमें चिंता की कोई बात नहीं है।  अजय सिंह, ठेकेदार

क्या कहते हैं अधिकारी

आरईओ रोड 8 से 10 टन लोड लेकर चलने के लिए है। लेकिन, इस सड़क पर 28 से 30 टन तक लोड लेकर वाहन चलते हैं। इस कारण भी सड़कें उखड़ती हैं। सरकार को चाहिए कि हमलोगों को भी हैवी रोड बनाने का एस्टिमेट दे। आरईओ की सड़क के निर्माण पर प्रति किलोमीटर 50 से 60 लाख की लागत आती है। जबकि हेवी रोड 2 करोड़ प्रतिकिलोमीटर की दर से बनती हैं। इस कारण सड़कों में अंतर होना स्वभाविक है।  बीडी राम, अधीक्षण अभियंता, आरईओ, बोकारो

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