किसी भी व्यक्ति को अपनी सभ्यता, भाषा व संस्कृति कभी नहीं भुलानी चाहिए। इसी के बदौलत उसकी समाज में पहचान होती है। यह कहना है सांसद पशुपतिनाथ सिंह का। वे बोकारो क्लब में आयोजित अखिल भारतीय मगही महासम्मेलन को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। सांसद ने कहा, गौतम बुद्ध और सम्राट अशोक ने भी अपनी इस भाषा और संस्कृति को कभी नहीं छोड़ा और उसे विदेशों तक पहुंचाया। मगही भाषा को शीघ्र ही झारखंड की सूची में शामिल कर पहचान दिलाई जाएगी।
बिहार विवि के पूर्व कुलपति रामबदन सिंह ने कहा कि जो व्यक्ति अपनी भाषा को भूल जाते हैं वैसे व्यक्ति अपने समाज में ही गुमनाम हो जाते हैं। केपी शर्मा ने कहा कि अपने जीवनकाल में आज तक विद्यार्थियों की ही परीक्षा लेते आए हैं, पहली बार लोगों के बीच परीक्षा दे रहे हैं। जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष डॉ. अली इमाम खान, जगरनाथ शाही सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। उतरा नामक मगही पुस्तिका का विमोचन किया। आयोजक वेंकटेश्वर शर्मा और संचालक डॉ. परमेश्वर भारती और सुनील सिंह थे। भोजपुरी, खोरठा व मैथिली साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।
बोकारो क्लब में आयोजित अखिल भारतीय मगही महासम्मेलन के अतिथि।