जिले के सभी सरकारी एवं गैर सरकारी स्कूलों में 10 मई से 18 जून तक ग्रीष्मावकाश रहेगा। ग्रीष्मावकाश के दौरान सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य तो नहीं चल रहा है लेकिन जिले में 424 गावों के सरकारी विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक बच्चों को मिडडेमील का पोषाहार खिलाया जा रहा है। लेकिन नामांकित बच्चों की तुलना में बहुत कम बच्चे विद्यालय आकर पोषाहार खाते हैं।
जानकारी के अनुसार राजस्थान सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग द्वारा गंभीर सूखाग्रस्त घोषित जिले के 424 गावों के सरकारी स्कूलों में नामांकित बच्चों को पोषाहार खिलाया जा रहा है। इसमें सभी सरकारी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक बच्चों को पूर्व निर्धारित मीनू के अनुसार ही अवकाश के दिनों को छोडकर नियमित रूप से पोषाहार खिलाया जा रहा है।
बहुत कम रह रही है सरकारी स्कूलों में उपस्थिति
इन दिनों सरकारी स्कूलों में बच्चों को खिलाए जा रहे पोषाहार के दौरान स्कूलों में बहुत कम उपस्थिति रह रही है। इस संबंध में जानकारी करने पर पाया कि राजकीय बालिका उमावि बौंली में कक्षा 1 से 8 तक नामांकित 140 छात्राओं में से 10 मई से अब तक औसतन 45 छात्राएं ही पोषाहार खाने आ रही है। यहां 10 मई को 40, 11 को 52, 12 को 50, 14 को 42, 15 को 50, 16 को 46, 17 को 50 एवं 18 को 46 छात्राओं की उपस्थिति रही है। इसी प्रकार राउमावि बौंली में नामांकित 60 में से 10 मई को 22, 11 को 15, 12 को 15, 14 को 18, 15 को 28, 16 को 15, 17 को 27 एवं 18 को 15 छात्रों की उपस्थिति रही है। रमजान शुरू हो जाने के बाद इस स्कूल में उपस्थिति में और कमी आई है। शनिवार को केवल दो बच्चे ही पोषाहार खाते हुए मिले जबकि पोषाहार अधिक बच्चों का बनाया हुआ था। सहशाला प्राथमिक स्कूल बौंली में नामांकित 58 में से 10 मई को 25, 11 को 10, 12 को 20, 14 को 18, 15 को 21, 16 को 22, 17 को 21 एवं 18 को 18 छात्रों की उपस्थिति रही है।
बौंली। एक सरकारी विद्यालय में पोषाहार खाते दो बच्चे।
बनाना पड़ता है अपेक्षा से अधिक का खाना
एक पोषाहार प्रभारी ने बताया कि सुबह करीब दस बजे तक बच्चे पोषाहार खाने आते हैं जबकि खाना पहले ही बनवाना पडता है। ऐसे में अनुमान से ही खाना बनवाते हैं यदि अधिक बच्चे आ जाएं तो बाद और खाना बनवाना पडता है तथा यदि बच्चे कम आएं तो खाना तो बचता है, लेकिन उसका समायोजन करने के लिए बनाए गए खाने के अनुसार ही लाभान्वित बच्चों की संख्या दर्शानी पडती है।
अलग से लगा है एक अध्यापक
जिले के सरकारी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक बच्चों को पोषाहार खिलाने के लिए विभाग द्वारा सभी स्कूलों में एक-एक अध्यापक को पोषाहार बनवाकर बच्चों को खिलाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बदले संबंधित अध्यापकों कों कुल कार्य दिवस के एक तिहाई पीएल देय होगी।
अच्छा होता निजी स्कूल के बच्चों को भी इसमें शामिल करते
ग्रीष्मावकाश के दौरान बच्चों को पोषाहार खिलवाने के पीछे सरकार का उद्देश्य यह है कि सूखाग्रस्त घोषित गावों में बच्चों को पोषाहार के रूप में भोजन मिले और उनके अभिभावकों को कुछ राहत मिल सके। लेकिन और अधिक अच्छा तब होता जब इस योजना में सूखाग्रस्त घोषित गावों के निजी स्कूलों के बच्चों को भी इस योजनांतर्गत पोषाहार खिलवाया जाता।
ब्लॉकवार इस प्रकार है सूखाग्रस्त गांवों की संख्या
जानकारी के अनुसार राजस्थान सरकार के आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग द्वारा जिले के सवाई माधोपुर ब्लॉक में 153, बौंली ब्लॉक में 150, चौथ का बरवाड़ा में 68, एवं बामनवास में 53 गांवों को गंभीर सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। इनके सरकारी स्कूलों में पोषाहार बनाया जा रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में बौंली के ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षाधिकारी पल्लीवाल मीना ने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार संबंधित पंचायत प्रारंभिक शिक्षाधिकारी एवं सभी सरकारी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के संस्था प्रधानों को ग्रीष्मावकाश के दौरान कक्षा 1 से 8 तक बच्चों को मिडडेमील के तहत पोषाहार खिलाने की व्यवस्था करने को कहा गया है। उपस्थिति कम रहने के बारे में उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे क्या कर सकते हैं, यह तो सरकार के आदेश हैं।