बूंदी. तुलाई नहीं होने से नाराज किसान कुंआरती मंडी में प्रदर्शन करते हुए।
बूंदी. तुलाई नहीं होने से नाराज किसान कुंआरती मंडी में प्रदर्शन करते हुए।
बूंदी| किसानों को न सरकारी खरीद केंद्रों पर राहत मिल रही है और न ही मंडियों में। नई कुंआरती कृषि मंडी में सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक कांटों की जांच के चलते माल नहीं बिका तो नाराज किसानों ने मंडी गेट पर ताला जड़ दिया और प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि मंडी प्रशासन अगर उन्हें पहले सूचना दे देता कि सोमवार को माल नहीं खरीदा जाएगा तो वे इस गर्मी में माल ही लेकर नहीं आते।
अब पूरे दिन तपने के साथ अगले दिन के इंतजार में रात भी गुजारनी पड़ेगी, जबकि मंडी में पीने को ना ठंडा पानी है, ना रहने का बंदोबस्त। अब मंगलवार का दिन भी उनका बेकार चला जाएगा। बाद में समझाइश के बाद मंडी के ताले खोल दिए गए। हालांकि मंडी में कोई कारोबार नहीं हो सका।
मंडी प्रशासन पहले सूचना देता तो भाड़ा नहीं लगता: किसान
प्रेमपुरा से आए किसान रामचरण, कल्याणपुरा के हजारीलाल, कैलाशचंद्र, गोविंदपुर के महेंद्र मीणा, दौलाड़ा के गुरविंदरसिंह, जसवीरसिंह ने बताया कि मंडी प्रशासन पहले ही सूचना जारी कर देता कि सोमवार को माल की बोली नहीं लगेगी तो वे माल लेकर ही नहीं आते। मंडी में ना किसानों के बैठने के लिए छाया है, ना ठंडा पानी है, ना रात को सोने-बिछाने की सुविधा है, माल खुले में पड़ा रहेगा, अगर अंधड़-बारिश आ गई तो गेहूं, चना खराब हो जाएगा। पहले बता दिया जाता तो इस भयंकर गर्मी में वे दो दिन, एक रात तक परेशान क्यों होते। इलेक्ट्रॉनिक कांटों की जांच ही करनी थी तो रविवार को मंडी में अवकाश के दौरान कर लेनी चाहिए थी। किसानों के मुताबिक मंडी में एक प्याऊ है, जिसमें छत की प्लास्टिक टंकियों से गर्म पानी पीना पड़ता है। पानी ठंडा रखने के लिए मंडी में बर्फ मंगाई जाती है, मगर वह पानी किसानों को नहीं पिलाया जाता। बर्फ वाली टंकी प्याऊ के अंदर रखकर बाहर ताला जड़ दिया जाता है। गर्म पानी पीने लायक नहीं है। किसानों ने बताया कि सुबह 10.30 बजे माल की बोली शुरू ही हुई थी कि इलेक्ट्रॉनिक कांटों की जांच करने वाले पहुंच गए। ऐसे में तुलाई, बोली बंद हो गई। व्यापारी भी चले गए, पर अब हम अपना माल किसके भरोसे छोड़कर जाएं। उनका यह भी कहना था कि खाली कट्टे का वजन चार सौ-सवा चार सौ ग्राम होता है, जबकि व्यापारी 750 ग्राम माल काटते हैं।