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सुनील के लैंडस्केप सृजन से तैयार की जाएगी खास डॉक्यूमेंट्री बुक

3 वर्ष पहले
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जिस तरह एक रचना धर्मी एक अच्छी रचना के लिए चिंतन-मनन कर कागज पर कलम चलाता है, वैसे ही कलाकार भी अपने चित्रों में मौलिकता बनाए रखते हुए कल्पना करता है। सभी दृष्टिकोण से चिंतन करता है और फिर कल्पना को स्केच कर उसे अंतिम रूप देकर कैनवास या ड्रांइग शीट पर उतारता है। कला के विभिन्न रूपों में लैंडस्केप कला भी एक ऐसी ही मनमोहक कला है, जिसे कलाकार वस्तु स्थिति के अनुरूप ही सृजन करता है।

इस कला के माध्यम से बूंदी के 40 वर्षीय युवा कलाकार सुनील जांगिड़ ने अपनी पहचान बनाई है। मॉडर्न आर्ट एवं पोट्रेट कला में अपनी पहचान बना चुके सुनील के लैंडस्केप में ऐसे लगता है कि गलियां बोलती हैं। उनके लैंडस्केप सृजन में बूंदी की ऐतिहासिक धरोहर, पुराने शहर की गलियां, प्राचीन हवेलियां, खंडहर, जाली झरोखे आदि शामिल है। इतना ही नहीं उनके लैंडस्केप में शहर की पुरा संपदा के चित्रण देखने के बाद तो कलेक्टर ने अतीत को सहेजने के लिए डॉक्यूमेंट्री बुक तैयार करवाने के निर्देश पर्यटन विभाग को दे दिए।

उल्लेखनीय हैं कि सुनील ने राजस्थान दिवस पर पर्यटन केंद्र पर एकल प्रदर्शनी लगाई थी। जिसे देसी-विदेशी सैलानियों सहित जिलेवासियों ने भी खूब सराहा था। प्राकृतिक चित्रण के क्षेत्र में चित्रकला व्याख्याता पंकज सिसोदिया को प्रेरणा स्त्रोत मानने वाले आर्टिस्ट सुनील जांगिड़ ने लैंडस्केप सर्जन को सर्वाधिक महत्व दिया है। उन्होंने दर्शकों को अपनी धरोहर पर गर्व करने का अवसर दिया। उनकी प्रर्दशनी को देखने के बाद तो अब अलसाए कलाकार भी प्रेरणा प्राप्त कर फिर से सृजन में जुड़ने का मन बनाने लगे हैं।

सुनील जांगिड़

बूंदी. बालचंद पाड़ा की गलियाें को इस तरह हूबहु दिखाया है।

बूंदी. सुनील के लैंडस्केप सृजन में नजर आ रही शहर के गढ़ की पड़स।

हाड़ौती के महत्वपूर्ण लैंडस्केप बनाएंगे

सुनील का लैंडस्केप सृजन का भावी लक्ष्य है हाड़ौती के महत्वपूर्ण लैंडस्केप बनाना और फिर बाद में प्रदेश की अन्य क्षेत्रों में कदम बढ़ाना। इससे कि हम अपने राजस्थान की पुरा संपदा पर गर्व कर सकें तथा संरक्षित करने का सोच बन सके। कला प्रेमियों व प्रबुद्धजनों कहते हैं कि आर्टिस्ट सुनील जांगिड़ ने प्राचीन धरोहरों की सुरक्षा को लेकर बनाए लैंडस्केप हमें अपनी पुरासंपदा पर गर्व करने तथा मन का आनंद भरा अवसर देते हैं।

यह है लैंडस्केप कला सृजन प्रक्रिया

सुनील ने अपनी लैंडस्केप कला सृजन प्रक्रिया के बारे में बताया कि चित्र का सहज स्वाभाविक प्रभाव दर्शाने के लिये मुख्यतः पूना हैंडमेड ड्रांइग शीट पर ही इसे बनाया जाता है। शीट पर पेंसिल स्केच से स्थान विशेष को चित्र बनाया जाता है। इसे अंतिम रूप प्रदान करने के बाद जल रंगों को ब्रश से गहरे से हल्के रंग की ओर चलाया जाता है। चित्र पर रंगों के सही प्रभाव के लिये प्रातः कालीन सृजन ही मेरी पंसद होते है।

यह बोले पर्यटन अधिकारी

बूंदी शहर की गलियों व ऐतिहासिक पैलेस पर बनाए लैंडस्केप, चित्रों की डॉक्यूमेंट्री बुक को लेकर तैयारियां चल रही है। सुनील के लैंडस्केप सहित कई कलाकारों के चित्र इसमें शामिल होंगे। विदेशी सैलानी शहर गलियों, झरोखों, छज्जों, प्राचीन हवेलियों, महलों को अपने कैमरे में क्लिक कर ले जाते हैं। और वहां इन्हें अपने ड्रांइग रूप की शोभा बढ़ाने में उपयोग में लेते हैं। जो लोग शहर में नहीं आ पाते उनके लिए डॉक्यूमेंट्री बुक काफी कारगर होगी। -प्रेमशंकर सैनी, सहायक पर्यटन अधिकारी

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