बच्चों ने निकाली रैली, शांतिधारा-नित्य पूजन हुआ
कस्बे में जैन मंदिर परिसर में दस दिवसीय संयम संस्कार शिविर मंगलवार से शुरू हुआ। संस्कार शिविर से पूर्व जैन मंदिर से सुबह रैली निकाली गई। जो कस्बे के विभिन्न मार्गो से होती हुई वापस मंदिर पहुंची। रैली में पाठशाला के छात्र-छात्राएं निर्धारित गणवेश में मंगलकलश व शास्त्र सिर पर धारण कर शिक्षाप्रद नारों से लिखी तख्तियां, झंडे, बैनर हाथों में लिए चल रहे थे। वहीं, जैन मंदिर में शास्त्री राहुल भैया के नेतृत्व में शांतिधारा, नित्य पूजन हुआ।
शिविर का शुभारंभ चौथमल जैन ने ध्वजारोहण व मंगलकलश स्थापना कर किया। वरिष्ठ शिक्षक मानमल जैन ने बताया कि जैनाचार्य विद्यासागर महाराज के 50वें दीक्षा जयंती संयम स्वर्ण महोत्सव के उपलक्ष्य में संयम संस्कार शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर 15 से 25 मई तक रोजाना शाम को साढ़े छह से रात नौ बजे तक चलेगा। इस दौरान शिविरार्थी महिला-पुरुष व बच्चों की अलग-अलग कक्षा लगेगी। नित्य पूजा, शास्त्र ज्ञान, मंगल आरती तथा विभिन्न सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजन होंगे। कार्यक्रम के दौरान समाज अध्यक्ष ज्ञानचंद गोयल, तेजमल जैन सहित समाज के पदाधिकारी व समाजबंधु मौजूद थे।
करवर। कस्बे में जैन समाज के बच्चों ने शिविर के शुभारंभ पर निकाली रैली।
समय के साथ स्वयं को बदलो: मुनिश्री
बूंदी का गोठड़ा| अलोद स्थित श्रीपार्श्वनाथ बघेरवाल दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार सुबह श्रमण श्रीविभंजन सागर का मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर जैन समाजबंधुओं ने मुनिश्री के पाद प्रक्षालन व आरती कर स्वागत किया। मुनिश्री ने जैन मंदिर में दर्शन कर अभिषेक, शांतिधारा करवाई। उसके पश्चात प्रवचन देते हुए मुनिश्री ने कहा कि संत का आगमन जहां होता है वहां सोना-सोना हो जाता है और जहां से संत का विहार होता है वहां सूना-सूना हो जाता है। मुनिश्री ने बताया कि संतों का समागम बड़े पुण्य के उदय से मिलता है। जब तक हमारा पुण्य उदय नहीं होगा तब तक हमें किसी संत की सत्संगति नहीं मिलेगी। सत्संगति में निवास करना और स्वर्ग में निवास करना दोनों बराबर ही होते है। ऐसा अर्थ शास्त्र में बताया गया है कि जब-जब जिस समय साधु की अच्छी संगति में बैठने का अवसर हमें मिले उसे छोड़ना नहीं चाहिए।