महिला बंदियों को पुनर्वास और उनके कानूनी अधिकार बताए
बूंदी| जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में महिला बंदियों को विधिक सेवाएं सुचारू रूप से उपलब्ध कराने के लिए गठित टीम के प्रशिक्षण के लिए कलेक्ट्रेट सभागार कार्यशाला हुई। विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव मनीष हरजाई, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनील कुमार विश्नोई द्वारा गठित टीम को मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
प्राधिकरण द्वारा गठित टीम को योजना के तहत दिन प्रतिदिन की जाने वाली गतिविधियों के बारे में जानकारी प्रदान की गई। जिसमें महिला बंदियों के आंकड़ों का संकलन, स्वास्थ्य परीक्षण, विधिक सहायता, विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन, शिक्षण व व्यवसायिक प्रशिक्षण, स्वच्छता की स्थिति, महिला बंदियों के पुनर्वास के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। पूर्णकालिक सचिव हरजाई ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण व राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार 9 सदस्यीय टीम का गठन किया गया। जिसमें मनोचिकित्सक डॉ. रश्मि गुप्ता , महिला चिकित्सक डॉ. चंद्रेश मीणा,महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रभा मिश्रा ,उपाधीक्षक जिला कारागृह कैलाश प्रसाद शर्मा ,चिकित्सा अधिकारी जिला कारागृह डॉ. सत्येंद्र सिंह पोहिया, एडीईओ चंद्र प्रकाश राठौर,एडीईईओ उदालाल मेघवाल, बूंदी महिला गृह उद्योग प्रशिक्षण संस्थान संस्कृति अध्यक्ष शालिनी विजय, पैनल अधिवक्ता हिमांशी शर्मा, पैनल अधिवक्ता मीना जांगिड़ शामिल हैं। टीम 17 मई से 26 मई तक 10 दिवसीय कार्यक्रमों का करेगी। बंदी महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, प्रसूति सहायता, मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य सेवा, निशुल्क विधिक सहायता, शिक्षण व व्यवसायिक प्रशिक्षण व पुनर्वास के संबंध में सेवाएं उपलब्ध कराई जाएगी।
बूंदी. विधिक सेवाए देने के लिए कार्यशाला लेते हुए विधिक अधिकारी।