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रात को आए नए आदेश; रोजेदार शिक्षकों ने कैंप में ही खोला रोजा..कुछ ने छोड़ दिया

3 वर्ष पहले
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जिले के पांचों ब्लॉक में सोमवार से शिक्षकों के आवासीय प्रशिक्षण शिविर शुरू हुए। हालांकि शिक्षिकाओं को शिविरों में रात को रुकने को लेकर एतराज था तो रोजेदार शिक्षक भी परेशान रहे। दरअसल रोजेदार शिक्षकों के लिए पहले सरकार से आदेश मिले कि प्रशिक्षण शिविर में उन्हें रात्रि ठहराव से छुट्‌टी मिलेगी, पर फिर इस आदेश की जगह संशोधित आदेश आ गए।

राज. प्रारंभिक शिक्षा आयुक्त जोगाराम की ओर से जारी आदेश के मुताबिक रोजेदार शिक्षकों को 21 मई से 14 जून तक लगने वाले ग्रीष्मकालीन आवासीय प्रशिक्षण शिविरों से मुक्त किया जाता है, इन्हें शिविर के 5वें चरण 18 जून से 23 जून में शामिल किया जाएगा। ये आदेश रविवार रात को आने से शिक्षकों तक पहुंच नहीं सके। ऐसे में रोजेदार शिक्षक भी सोमवार को शिविरों में आ गए और अपनी हाजिरी लगा दी। रोजेदार शिक्षकों ने शाम को घर लौटने की इजाजत मांगी तो उन्हें शिविर छोड़ने से मनाकर दिया गया। यह कहते हुए कि पूर्व के आदेश की जगह संशोधित आदेश आ चुके हैं। रोजेदार े शिविर में आ चुके हैं, ऐसे में रात्रि ठहराव यहीं करना होगा। बूंदी ब्लॉक में केसीबीवी माटूंदा में एक ही कैैंपस में लगे दो आवासीय प्रशिक्षण शिविरों में ऐसी ही समस्या आई। चार शिक्षिकाओं ने राेजा रखा हुआ था। उन्हें रात में शिविर छोड़ने की इजाजत नहीं मिली तो मजबूरी में शिविर में ही रोजा खोला।

बूंदी.माटंूदा कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास में चल रहे शिविर में क्लास में बच्चों के साथ शिक्षिकाएं।

जिन रोजेदार शिक्षिकाओं ने शिविर ज्वाइन कर लिया, उन्हें अब रात्रि ठहराव में छूट नहीं मिलेगी। नए आदेश देर से मिले, सभी तक पहुंच नहीं सके। रोजा इफ्तारी के लिए शिविर में ही फल-फ्रूट, जूस की व्यवस्था कर दी गई। शिक्षिकाओं के लिए रात्रि ठहराव के सभी बंदोबस्त हैं। बुद्धिप्रकाश मीणा, ब्लाक संदर्भ व्यक्ति (रिसोर्स पर्सन)

खाने-नाश्ते के लिए शिक्षिकाओं की ही कमेटी बना दी गई है। खाने-नाश्ते, चाय-पानी के लिए 150 रुपए प्रति शिक्षक का बजट है। कमेटी के मीनू के मुताबिक नाश्ता-खाना बनता है। सबके लिए अलग-अलग खाना तो नहीं बना सकते। प्रशिक्षण निर्विघ्न चल रहा है। -रामराजसिंह सोलंकी, शिविर प्रभारी

इसलिए रात को कैंप में नहीं रुकना चाहती हैं शिक्षिकाएं

बूंदी ब्लॉक में दो आवासीय प्रशिक्षण शुरू हुए, दोनों केसीबीवी माटूंदा में ही रखे गए। पहले दिन 88 शिक्षिकाएं उपस्थित रही। रात 8 से 9 बजे के बीच बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी हुई। शिविरों में शिक्षिकाओं ने रात्रि ठहराव पर नाराजगी जताई। उलाहने दिए कि बूढ़े सास-ससुर घर में अकेले हैं, उनके लिए खाने-दवा की समस्या है। किसी का कहना था कि उनके पति बाहर काम करते हैं, पीछे छोटे बच्चे पड़ोसियों के हवाले छोड़कर आई हैं, पर 6 दिन तक पड़ोसी भी उन्हें कैसे संभालेंगे और वे मां के बगैर रहेंगे भी कैसे, ऐसी कई समस्याएं सामने आई। शिविरों में कई शिक्षिकाएं अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर अटाई। बच्चे परेशान हो गए। रामगंजबालाजी की शिक्षिका कल्पना का बच्चा दृष्टिहीन-श्रवणहीन है। उसे घर में दादी के पास छोड़कर आई है, पर उसकी देखभाल उसके बिना नहीं हो सकती। इस पर शिक्षिका को कहा गया कि ऐसे केस में शिविर में नहीं आने की छूट मिल सकती थी, पर उन्होंने लिखित में नहीं दिया। शिक्षिका का कहना था कि जो भी नियम हैं, उस बारे में शिक्षकों को बताया जाना चाहिए था।

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