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अच्छी बरसात की उम्मीद में तय लक्ष्य से ज्यादा रकबे में हो चुकी है धान की रोपाई

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | बूंदी/नमाना रोड

आधा सावन बीतने को है और मानसून का कोई अता-पता नहीं। अब किसान मुरझाती धान की फसल को बचाने के लिए नहरी पानी की उम्मीद कर रहे हैं। अच्छी बरसात की उम्मीद में किसानों ने लक्ष्य के मुकाबले अधिक रकबे में धान की रोपाई कर दी, लेकिन अब रोपी फसल बचाने का संकट खड़ा हो गया है। अभी भी किसान नर्सरी लगाकर धान की पौध इस उम्मीद में संभालकर बैठे हुए हैं कि बरसात हो जाए तो खेतों में धान की रोपाई कर दें।

माली हालत डांवाडोल होने के बावजूद फसल को बचाने के लिए किसान रात-दिन इंजन चलाकर डीजल फूंक रहे हैं। किसान सेठ, साहूकारों से पैसा मांग रहे तो वे भी हालात देख किसानों को पैसा नहीं दे रहे। जब फसल ही नहीं होगी तो किसान पैसा वापस कैसे करेगा। वैसे तो धान के लिए बरसात का पानी अमृत है, लेकिन जब अमृत वर्षा नहीं हो रही है तो किसान नहरी पानी को ही अब एक मात्र सहारा मान रहे हैं।

40 हजार हैक्टेयर में हो चुकी रोपाई

सीएडी क्षेत्र में 35 हजार हैक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 40 हजार हैक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी है। अब भी बरसात हो जाती है तो धान की फसल बच जाएगी और रकबा और अधिक बढ़ेगा। किसानों ने खेतों को खाली छोड़ा हुआ है। नर्सरी में धान की पौध तैयार है। बस एक अच्छी बरसात का इंतजार है। रिस्क लेने वाले किसान सावन मास की अमावस्या तक भी धान की रोपाई कर देते हैं।

बरसात नहीं होने से किसान मायूस, नहरी पानी दे सकता है मुरझाए धान को जीवनदान

नमाना रोड। गुमानपुरा गांव में बारिश नहीं होने से सूखी धान की फसल में निराश बेटा किसान जोधराज मीणा।

खेतों के आसपास के गड्‌ढे भी नहीं छोड़े

नियमित बिजली नहीं मिलने से किसान डीजल इंजनों पर ही विश्वास कर रहे हैं। ट्यूबवेलों का जलस्तर भी गिरता जा रहा है। किसान फसल को बचाने के लिए खेतों के आसपास बने गड्ढों में भरे पानी को भी नहीं छोड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि फसल को पानी चाहिए तो क्या करें। हालात विकट होते जा रहे हैं। बरसात के मौसम में मई, जून की गर्मी का अहसास हो रहा है।

बरसात नहीं होने से किसान चिंतित हैं। अच्छी बरसात की उम्मीद में किसानों ने लक्ष्य के मुकाबले अधिक रकबे में धान की रोपाई की है। फसल को बचाने के लिए किसान डीजल इंजन, बिजली से मोटरों को चलाकर काम चला रहे हैं। बरसात का पानी फसलों के लिए अमृत का काम करता है। -आरसी जैन, कृषि विस्तार अधिकारी सीएडी

इधर हुई हल्की बरसात

झालीजी का बराना|
इंद्रदेव की 20 दिन बाद हुई हल्की फुल्की मेहरबानी पर किसानों के चेहरों पर रौनक देखने को मिल। दोपहर बाद से ही मंडराए बादलों ने आखिरकार किसानों पर रहम की बौछार करना प्रारंभ किया। शाम 5 बजे ही हल्की बरसात होना शुरू हुई तो किसानों की खेतों में लहलहा रही फसल सोयाबीन, उड़द, धान को जीवनदान मिलना साबित हो सकती है।

किसानों की पीड़ा

सरकार बाईं मुख्य नहर में पानी छोड़ दे तो धान की फसल बच सकती है। बरसात नहीं होने से पेसोपेश में पड़ सकते हैं। धान की सूखती फसल को देखकर आंखों में आंसू आ जाते हैं। जिस जमीन में धान की रोपाई की है उसमें दरारें पड़ने लगी है। -किशनबिहारी बैरागी, किसान

इस बार 35 बीघा जमीन ज्वारे पर ली थी। अब तक काफी पैसा खर्च हो चुका है। धान की फसल की थी, कुछ पैसा हाथ लग जाएगा, लेकिन हालात विपरीत हैं। बारिश नहीं हुई तो सब-कुछ बर्बाद हो जाएगा। सरकार राहत देने के लिए नहर में पानी छोड़े। -रामदेव सुमन, किसान

ब्याज पर पैसे का बंदोबस्त कर 22 बीघा जमीन ज्वारा काश्त पर ली थी। खाद, दवाइयों व डीजल में काफी पैसा खर्च हो गया है। बरसात आ नहीं रही है। नहरों में पानी छोड़े तो कुछ हाथ लग सकता है। अब तो खेतों काे भगवान भरोसे छोड़ दिया है। -पप्पूलाल मीणा, किसान

बरसात की उम्मीद थी, लेकिन अब किसान हताश हो रहे हैं। फसलों से कमाई पूंजी डीजल में जाती नजर आ रही है। डीजल का खर्च काफी भारी पड़ रहा है। ऐसे ही हालात रहे तो किसान कर्ज में डूब जाएंगे। -रामनिवास सैनी

घरेलू खर्च के पैसे भी डीजल व दवाइयों में जाते नजर आ रहे हैं। अब 15 दिन में खेतों को पानी नहीं मिला तो भारी नुकसान होगा। -मनोज सैनी, किसान

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