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गेंडौली सरकारी स्कूल में पहली कक्षा के बच्चे पढ़ लेते हैं अंग्रेजी

3 वर्ष पहले
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गेंडौली का सीनियर सेकंडरी स्कूल जिले के लिए रोल मॉडल बना हुआ है। दावा है कि यहां पहली कक्षा के बच्चे फर्राटे से हिंदी, अंग्रेजी पढ़ लेते हैं। और तो और डिक्टेशन में भी बच्चे पारंगत हैं।

अमूमन पहली कक्षा के बच्चे सही तरीके से बोल भी नहीं पाते हैं। ऐसे में उन्हें शब्दों व मात्राओं का ज्ञान होना निश्चित तौर पर हैरत में डालने वाला है। पिछले दिनों शिक्षा अधिकारियों ने स्कूल का निरीक्षण किया और वहां पहले कक्षा के बच्चों को जब इस तरह से हिंदी व अंग्रेजी बोलते सुना तो वे अचंभित रह गए। बच्चों को हिंदी की मात्राओं का ज्ञान भी पूरा था। इस स्कूल में पहली कक्षा में 16 बच्चों का नामांकन है और अधिकांश बच्चे आसपास की ढाणियों से पढ़ने के लिए यहां आते हैं। निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने भी माना कि इस स्कूल के शिक्षकों से दूसरे स्कूलों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।

बूंदी. पहली कक्षा के बच्चे फर्राटे से पढ़ते व लिखते हंै।

एसआईक्यूई से सर्टिफाइड है यह स्कूल

गेंडौली सीनियर सैकंडरी स्कूल एसआईक्यूई से सर्टिफाइड है। यह सरकार की ओर से जारी होना वाला गुणवत्ता प्रमाण-पत्र है। सर्टिफिकेट के लिए स्कूल काे आवेदन प्रस्तुत करने के साथ ही उसके सारे मानक पूरे करने होते है। शिक्षा विभाग के अधिकारी बच्चों को इस स्कूल में पढ़ाने के लिए अपनाए जा रहे तौर तरीकों को देखते हैं। इसके अलावा स्कूल का नामांकन व परीक्षा परिणाम को देखा जाता है। सरकार की ओर से मुहैया करवाई जा रही शिक्षण सामग्री का स्कूल में अध्ययन के दौरान पूरा उपयोग किया जा रहा है या नहीं। इन सब बातों को पूरा करने वाले स्कूलों को ही सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। बूंदी जिले में इस तरह के मात्र 20 स्कूल हैं।

बूंदी. निरीक्षण में बच्चों को देखकर अफसर भी चौंके थे।

ज्यादातर स्कूलों में नहीं बोल पाते बच्चे

स्तर सुधारने के लिए सरकार की ओर नए नवाचार किए जा रहे हैं। इसके बावजूद स्कूलों के हाल बेहाल बने हुए हैं। इसका उदाहरण आए दिन अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले निरीक्षणों के दौरान सामने आते हैं, जब बड़ी कक्षाओं के बच्चे न तो शब्दों को सही तरीके लिख पाते है और ना ही बोल पाते हैं।

शिक्षकों की मेहनत का नतीजा है

गेंडौली सीनियर सैकंडरी स्कूल में बच्चों पर शिक्षकों द्वारा मेहनत की जा रही है। दूसरे स्कूलों को इस स्कूल से प्रेरणा लेनी चाहिए और शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने का प्रयास किया जाना चाहिए। -सतीश जोशी, एडीपीसी, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, बूंदी

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