पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • जिला अस्पताल का ब्लड बैंक खाली इमरजेंसी के लिए 55 यूनिट ही बचा

जिला अस्पताल का ब्लड बैंक खाली इमरजेंसी के लिए 55 यूनिट ही बचा

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में सिर्फ इमरजेंसी के लिए 55 यूनिट ब्लड बचा हुआ है। इस स्टॉक से रोजमर्रा की जरूरत को तो पूरा किया जा सकता है, लेकिन बड़ा हादसा हो जाए और ब्लड की अधिक आवश्यकता हो तो काम चला पाना मुश्किल है। इसको देखते हुए कार्ड पर चेरिटी को दे पाना भी मुश्किल है।

पिछले डेढ़ माह से रक्तदान भी नहीं हुआ। इतना प्रचार-प्रसार होने के बावजूद ब्लड डाेनेट को लेकर आमजन में अभी भी जागरुकता नहीं आई है। ब्लड डोनेट करने पर दिए जाने वाले कार्ड का भी सदुपयोग नहीं हो पा रहा है।

नियमानुसार कार्ड इमरजेंसी पड़ने पर ब्लड डोनेट करने वाले के परिजनों के लिए ही दिया जाता है, लेकिन इसका उपयोग खुद के साथ दूसरों के लिए भी हो रहा है। ब्लड बैंक के कर्मचारियों का कहना है कि चेरिटी को मना करते हैं तो वे अभद्रता पर उतारू हो जाते हैं। गंभीर शिकायत करते हैं। स्टॉक में मौजूद ब्लड की उम्र 35 दिन रहती है। यदि इस अवधि में कार्ड से लेने वाला आ जाए तो फिर भी व्यवस्था बनी रह सकती है, लेकिन यहां 6-6 माह बाद तक भी ब्लड लेने के लिए आते हैं।

हर माह लगे रक्तदान शिविर तो जरूरतमंदों को मिले राहत

बूंदी. ब्लड बैंक में सिर्फ 55 यूनिट ब्लड ही बचा है।

मौजूदा स्टॉक से कर रहे जरूरत पूरी

हर माह ब्लड डोनेशन कैंप हो, ताकि ब्लड बैंक की व्यवस्था बनी रहे। इस समय बैंक के पास मात्र 55 यूनिट ब्लड का स्टॉक है। इमरजेंसी के लिए इस स्टॉक का रहना जरूरी है। मौजूदा ब्लड स्टॉक से रोगियों की आवश्यकता को पूरी किया जा रहा है। -हनुमानसहाय शर्मा, प्रभारी, ब्लड बैंक, जिला अस्पताल

जरूरत-30 यूनिट ब्लड हर माह थैलीसीमिया पीड़ितों को चाहिए

ब्लड बैंक के पास 30 रोगी तो थैलीसीमिया के ही हैं, जिन्हें हर माह ब्लड चढ़ाया जाता है, जबकि हर माह इतना ब्लड डोनेट भी नहीं हाे पा रहा है। थैलीसीमिया के कई रोगी की उम्र 10 वर्ष से अधिक है। ऐसे में उन्हें एक माह में दो यूनिट ब्लड चढ़ाया जाता है। ब्लड डोनेट से ही स्टॉक होता है। ब्लड बैंक में 130 यूनिट ब्लड स्टाॅक में रहना चाहिए। इसकी कैपेसिटी 1200 यूनिट तक की है।

परेशानी-10 प्रतिशत ब्लड तो खराब निकल जाता है

डोनेट वाले ब्लड में से करीब 10 प्रतिशत तो ब्लड खराब निकलता है। ऐसे में उसे काम में नहीं लिया जा सकता है। ब्लड डोनेट करने वालों में से कुछ हेपेटाइटिस-बी के पेशेंट मिलते हैं। कुछ को ब्लड से संबंधित अन्य बीमारियों होती है। यहां तक की एचआईवी के पेशेंट निकल जाते हैं। एेसे में कुछ डोनेट होने वाले ब्लड में से 10 प्रतिशत ब्लड खराब होता है, जिसे डिस्ट्रॉय करना पड़ता है।

ये विकल्प कर सकते हैं कमी पूरी

कार्ड का पूरी तरह से सदुपयोग हो, कार्डधारी स्वयं या परिजन के लिए ही इसका उपयोग करे।

ब्लड डोनेशन कैंप हर माह होने चाहिए, ताकि ब्लड बैंक में स्टॉक मौजूद रहे।

आमतौर पर लोग ब्लड लेना तो चाहते हैं, लेकिन उसके बदले में परिजनों को भी ब्लड नहीं देते।

आगे क्या-25 तारीख को रेडक्रॉस भवन में मेगा शिविर

ब्लड बैंक में रक्त की कमी को देखते हुए दाऊदयाल जोशी स्मृति संस्थान और ऑल इंडिया जैन माइनॉरिटी फैडरेशन की ओर से 25 मई को स्वैच्छिक रक्तदान शिविर लगाया जाएगा। यह मेगा शिविर रेडक्रॉस भवन में सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक लगेगा। स्मृति संस्थान के सचिव पीयूष जोशी ने बताया कि रक्तदान शिविर मूलरूप से ब्लड बैंक में रक्त की कमी को देखते हुए किया जा रहा है। उन्होंने आमजन से अपील की कि इस पुण्य काम में ज्यादा से ज्यादा लोग रक्तदान करें, ताकि ब्लड बैंक में जरूरतमंदों के लिए रक्त मिल सके।

खबरें और भी हैं...