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प्रशासन की नाकामी की वजह से देश छोड़ने की दुहाई देने लगा पूर्व सैनिक

3 वर्ष पहले
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पूर्व फौजी भगवानसिंह ने प्रशासन को लिखा मार्मिक ख्त

लोकतंत्र में अतिक्रमियों में प्रशासन का कोई डर नहीं। प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए। नैनवां तहसील में कार्यरत पटवारी रतनसिंह पर प्रशासनिक अधिकारी इतने मेहरबान हैं कि उसने बावड़ीखेड़ा में मेरी खातेदारी की भूमि 1 बीघा 8 बिस्वा पर कब्जा कर तारबंदी करवा दी। मैं प्रशासन की भ्रष्टाचार व भेदभाव की नीति से आहत हूं। क्या देश सेवा के बदले किसी फौजी को ऐसा ही सम्मान मिलता है? न्याय पाने के लिए मुझे ही अपमानित होना पड़ रहा है। ये कैसी संवैधानिक समानता के मौलिक अधिकार हैं? ये नेतृत्व क्षमता की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। मैं अब अपने सभी पेंशन व प्रमाणित दस्तावेज और सुविधाओं को केंद्रीय सरकार को लौटाकर अन्य देश की नागरिकता लेने की सोच रहा हूं। सन् 2012 में एस्सार फोन टेपिंग के संवेदनशील विषय की गंभीरता को राष्ट्र के संज्ञान में लाने के दौरान भी इतना अपमानित नहीं होना पड़ा। बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा के मेरे प्रयासों का ही परिणाम रहा कि प्रधानमंत्री ने 18 जून 2016 में प्रिंट मीडिया के समक्ष माना और निष्पक्ष जांच करा कार्रवाई का आश्वासन देना पड़ा, लेकिन अब बढ़ते भ्रष्टाचार से भयभीत हूं और अंतरात्मा की आवाज सुनकर अन्य देश की नागरिकता लेने पर विचार कर रहा हूं। दूसरे देश की नागरिकता के बाद भी देश सर्वोपरि रहेगा, मैं जहां भी रहूं, भारत माता की रक्षा के लिए तैयार रहूंगा। मेरा अंतिम अनुरोध यही है कि सरकारी अधिकारी भी राष्ट्रनीति और जननीति के अनुसार फर्ज निभाएं।

तहसीलदार का जवाब

हिंडाैली तहसीलदार भावनासिंह का कहना है कि जमीन पर अतिक्रमण की स्थिति में नियमानुसार एसडीएम कोर्ट में अपील करनी पड़ती है। पूर्व फौजी भगवानसिंह को बता दिया गया है। मामला आने के बाद पटवारी को मौका निरीक्षण करने भेज दिया गया था, यह पारिवारिक मामला है, सामलाती खाते की जमीन है। नियमानुसार जो भी मदद होगी, की जाएगी।

एसडीएम का जवाब

हिंडौली एसडीएम पूजा सक्सेना का कहना है कि मामला सामने आने के बाद मैने तहसीलदार को निर्देश दे दिए हैं, बुधवार को तहसीलदार से वस्तुस्थिति की रिपोर्ट लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह फौजी दुनिया को ही अलविदा कह गया

बूंदी. राताबरड़ा गांव के पूर्व फौजी नंदलाल फौजी तो अपनी जमीन से अतिक्रमण हटवाने के लिए लालफीताशाही से लड़ते-लड़ते दुनिया से ही चल बसे। वे भाजपा के बसोली मंडल अध्यक्ष भी थे। उन्होंने अतिक्रमण हटवाने के लिए सालों तक संघर्ष किया, धरना भी दिया, खूब गुहार लगाई। लाख कोशिशों के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला। लालफीताशाही से लड़ते-लड़ते ही वे न्याय की उम्मीद साथ लिए दुनिया को अलविदा कह गए।

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