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पाटीदार ने फंसाया-दुर्व्यवहार करने पर मैंने थप्पड़ मारा था: मनीषा आरोप बेबुनियाद-मनीषा ने ही मुझे एपीओ करवाया था: पाटीदार
एसीबी की चित्तौड़गढ़ टीम की ओर से बुधवार शाम बूंदी में जिला आबकारी अधिकारी कमलेश परमार, आबकारी निरीक्षक मनीषा राजपुरोहित और उसके ड्राइवर रूपलाल को ढाई लाख की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद देरशाम इस घटनाक्रम में नया मोड़ आया। अपने ड्राइवर की मार्फत एक लाख रुपए की रिश्वत लेती अपने कार्यालय से गिरफ्तार आबकारी निरीक्षक मनीषा राजपुरोहित ने सवाई माधोपुर में तैनात सहायक आबकारी अधिकारी परमानंद पाटीदार पर फंसाने के साथ कई गंभीर आरोप लगाए। पाटीदार पहले बूंदी में ही आबकारी निरीक्षक थे, जो पदोन्नति के बाद सवाई माधोपुर कार्यालय में तैनात हैं। इधर, डेढ़ लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार जिला आबकारी अधिकारी कमलेश परमार बूंदी में पुरानी चुंगी शीतला नगर में किराए के मकान में अपने बच्चे के साथ रहते हैं। एसीबी की इस कार्रवाई की जैसे ही लोगों को भनक लगी तो वे मौके पर जुटना शुरू हो गए। हालांकि, पुलिस ने उन्हें आसपास नहीं भटकने दिया।
ऐसे चली बातचीत-पहले बकाया क्लीयर कर दो, काम हो जाएगा
आरोपी जिला आबकारी अधिकारी व ड्राइवर
एसीबी के एएसपी चिरंजीलाल मीणा ने बताया कि बूंदी जिले के लांबाखोह गांव के भगवतसिंह और हिम्मतसिंह ने 11 मई को चित्तौड़गढ़ चौकी पर रिपोर्ट दी। इसके मुताबिक गणेशपुरा (डाबी) में उनके देशी शराब के ठेके पर बिक्री कम होने के कारण वे लोकेशन बदलकर देवाजी का खेड़ा गांव करना चाहते थे। वे इसके लिए आबकारी कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। एसीबी ने उसी दिन 11 मई को ही शिकायत की जांच करवाई। इसमें आबकारी अधिकारी ने 3 लाख रुपए मांगे। इसमें 2 लाख रुपए ठेके की लोकेशन बदलने के और एक लाख रुपए जनवरी से बकाया चल रही ठेके की बंधी के शामिल थे। फिर सौदा ढाई लाख में सौदा तय हो गया, पर उस रोज आबकारी निरीक्षक से बात नहीं हो सकी। इसके बाद 12 और 13 मई की छुट्टी आ गई। 14 मई को इन अधिकारियों की कोटा में मीटिंग थी। 15 मई को निरीक्षक के खिलाफ भी शिकायत का सत्यापन हो गया। उसने परिवादी से कहा कि पहले जनवरी से बकाया पुराना हिसाब क्लीयर कर दो, सालभर के लिए लोकेशन चेंज हो जाएगी। बुधवार को टीम दोनों परिवादियों के साथ बूंदी पहुंच गई। हिम्मतसिंह को पहले आबकारी अधिकारी के आवास पर भेजा गया। जहां उसने डेढ़ लाख रुपए की रिश्वत ले ली। इसके बाद उसे आबकारी कार्यालय में निरीक्षक के पास भेजा गया। उसने कर्मचारी मनीष को रुपए देने को कहा, पर मनीष नहीं मिला तो निरीक्षक के ड्राइवर रूपलाल को रुपए देने को कहा। ड्राइवर को एक लाख रुपए देते ही उसने गाड़ी में रख दिए। दोनों जगह टीमों ने दबिश दी। अचानक हुई कार्रवाई से ड्राइवर ने सोचा कहीं लुटेरे आ गए। उसने हल्का विरोध किया पर टीम ने उसे पकड़ लिया।
आरोपियों को ले जाती एसीबी टीम
कार्रवाई पर अधिकारियों में आरोप-प्रत्यारोप
पाटीदार के बारे में पूरे महकमे को पता है:म
आबकारी निरीक्षक मनीषा ने मीडिया के सामने आरोप लगाए कि पाटीदार ने उसे झूठा फंसाया। वह जब यहां था, तब उसने दुराचार का प्रयास किया था, मैंने उसे थप्पड़ जड़ा था। तब से वह मुझे परेशान करता रहता था, झूठी शिकायतें करवाता था। आज ही उसे रामगंजमंडी के किसी वीरेंद्रसिंह से मोबाइल पर फोन करवाया कि अगर वह नहीं मानी तो उसके साथ बहुत बुरा होगा। उसे समझा देना, उसने कितनों को ही ठिकाने लगा दिया है। पाटीदार के खिलाफ उच्चाधिकारियों को शिकायत की, पूरे महकमे को पता है। 4 मई को भी उसने अधिकारियों से शिकायत की थी। दाे साल तक उसने राम-राम करते हुए ड्यूटी की। मैं बीपी की पेशेंट हूं, विधवा हूं, मेरे साथ गलत हुआ है, मेरे पास रिश्वत के रुपए नहीं मिले, जबरन हाथ में रुपए थमाने का प्रयास करते रहे। मैं आत्महत्या कर लूंगी, मेरे बाद बच्चों को अनुकंपा नौकरी दिला देना।
सवा साल में मैंने कभी उससे बात तक नहीं की-पाटीदार
सवाईमाधोपुर के सहायक जिला आबकारी अधिकारी परमानंद पाटीदार ने आबकारी निरीक्षक मनीषा राजपुरोहित के दुराचार और फंसाने जैसे आरोपों को वाहियात करार दिया। उन्होंने कहा कि उसके दिमाग में मेेरे खिलाफ फोबिया है। थप्पड़ मारने की बात सरासर झूठी है। उसने 5-7 ब्लेकियों को अपना खास बना रखा था, जो मेरे दुश्मन थे, उनकी राय पर ही वह चलती थी। सवा साल से मैंने कभी उससे बात तक नहीं की। आबकारी के पूर्व कमिश्नर ओपी यादव को ढाल बनाकर उसने मुझे एपीओ तक करवा दिया था। इसी तरह जिला आबकारी अधिकारी को उसने कई बार डांट पड़वाई। मैं तो जिला आबकारी अधिकारी बनूंगा, उसकी पोस्ट पर तो लगूंगा नहीं, ना बूंदी आना चाहता हूं, जहां हूं, खुश हूं। फिर मैं क्यों उसे फंसाऊंगा। बारां में 10 हजार रुपए की रिश्वत मामले में पकड़े गए ओपी सोनी के मामले में भी उसने मुझ पर फंसाने के आरोप लगाए और पूर्व कमिश्नर को शिकायत कर दी।