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26 डॉक्टर ऐसे... जो घर पर जांच के बदले नहीं मांग सकते फीस

3 वर्ष पहले
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जिला मुख्यालय के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में 26 डॉक्टर ऐसे हैं, जो घर पर आने वाले मरीज से भी चेकअप के रुपए नहीं मांग सकते, क्योंकि सरकार इनको नॉन प्रेक्टिस भत्ता दे रही है।

फीस मांगते पाए जाने पर इनके खिलाफ शिकायत की जा सकती है। शिकायत सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई तय है। पीएमओ कार्यालय में इन डॉक्टरों की सूची लगाई हुई है, जिसमें यह संदेश है कि ये 26 डॉक्टर नॉन प्रेक्टिस भत्ता ले रहे हैं, इसलिए प्रेक्टिस के दौरान मरीज से रुपए नहीं मांग सकते।

इन्होंने सरकार को घोषणा-पत्र दिया है कि वे प्रेक्टिस नहीं करेंगे, इसलिए नॉन प्रेक्टिस भत्ता (एनपीए) दिया जाए। शहर के सभी डॉक्टर मरीजों से घर पर देखने के 100 से 150 रुपए तक फीस ले रहे हैं।

जिला अस्पताल

पीएमओ कार्यालय में इन डॉक्टरों की सूची लगाई, क्योंकि ये ले रहे हैं सरकार से नॉन प्रेक्टिस भत्ता

ये डॉक्टर ले रहे नॉन प्रेक्टिस भत्ता

जिला अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ व पीएमओ डॉ. नवनीत विजय, डिप्टी कंट्रोलर डॉ.ओपी वर्मा, डॉ. गजेंद्र वर्मा, डॉ. मंजू बाथरिया, डॉ. लक्ष्मी वर्मा, डॉ. सुरेश अग्रवाल, डॉ. नरेश जाटोलिया, डॉ निर्मला मीणा, डॉ. दिनेश शर्मा, डॉ. अनिल गुप्ता, डॉ. सत्यनारायण मीणा, डॉ. योगेश शर्मा, डॉ. निर्मल कुमार जैन, डॉ. बाबूलाल मीणा, डॉ. परमानंद मीणा, डॉ. किशनलाल, डॉ. छोटूलाल दाधीच, डॉ. अनिल अरोडा, डॉ. डीबी मीणा, डॉ. राजेश वृंदवानी, डॉ. विजयकुमार शर्मा, डॉ. लक्ष्मीनारायण मीणा, डॉ. भागचंद नागर, डॉ. रिषी कुशवाह, डॉ. वीरेंद्र प्रताप सैनी, डॉ. केसी मीणा को नॉन प्रेक्टिस भत्ता दिया जाता है।

सरकार को लाखों का नुकसान

डॉक्टरों के मूल वेतन पर करीब 25 फीसदी एनपीए मिलता है। फिर भी एनपीए लेने वाले कई डॉक्टर मरीज से परामर्श शुल्क ले रहे हैं और सरकार को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

नॉन प्रेक्टिस भत्ता लेने वाले डॉक्टर घर पर मरीज को जांचने के रुपए नहीं ले सकते हैं। अगर ले रहे हैं तो गलत है। उनके खिलाफ कार्रवाई के प्रावधान हैं। डॉ. ओपी वर्मा, डिप्टी कंट्रोलर, जिला अस्पताल

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