बूंदी| शुक्ला गेट के सामने एक-डेढ़ महिने से रोजाना पानी सप्लाई के दौरान पाइप लीकेज होने से पानी सड़क पर बहता रहता है। सीवरेज की खुदाई के दौरान पाइप लाइन टूट गई थी, जिसे प्लास्टिक पाइप का टुकड़ा लगाकर जोड़ दिया गया। गाड़ियां गुजरने से प्लास्टिक पाइप टूट गया और रोज करीब दो हजार लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। जो कि सौ लीटर प्रति व्यक्ति पानी के हिसाब से पांच सदस्यीय पांच परिवारों की एक दिन की जरूरत जितना पानी है। इस बारे में जलदाय अधिकारियों को भी बता दिया गया पर इसे दुरुस्त नहीं किया गया है। यह फोटो भास्कर जलमित्र ओपी कुकी ने भेजा है।
भास्कर जल मित्र अभियान के तहत पाइपलाइनों में लीकेजों से रोजाना बहने वाले पानी की बर्बादी रोकने के लिए जल मित्रों ने फोटो भेजे हैं, जलदाय विभाग लीकेजों को दुरुस्त कर दें तो पेयजल मिल सकता है
बूंदी. यह है पुरानी कृषि मंडी की टंकी से बहते पानी का नजारा। रोजाना टंकी भरने के लिए नलकूप चलाकर छोड़ दिया जाता है। टंकी भरने के बाद पानी बाहर बहने लगता है। ना जाने कितने समय से यह सिलसिला यूं ही चला आ रहा है। पानी की बर्बादी का आकलन लगाएं तो पांच-सात हजार लीटर पानी रोज बहता होगा। यह इतना पानी की है कि रोजाना 40 से 50 परिवारों की पानी से संबंधित दैनिक जरूरतें आराम से पूरी हो सकती हैं। मंडी प्रशासन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
बूंदी. गर्मी में जगह-जगह पानी के लिए धरना-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। वहीं शहर के नैनवां रोड पर वाटर वर्कर्स के एसई दफ्तर के पास ही नाले पर वाटर वर्कर्स की पानी सप्लाई लाइन के ज्वाइंट से रोजाना मोटे अनुमान के मुताबिक पांच हजार से ज्यादा लीटर पानी गंदे नाले में बह जाता है। 100 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से इतना पानी 50 से 60 लोगों की दैनिक जरूरतों के लिए पर्याप्त है। एक महिने को जोड़ दें तो डेढ़ लाख लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। यह हाल तो वाटर वर्कर्स दफ्तर के एसई आॅफिस से कुछ मीटर दूर पर है। शहरभर में इस तरह के दर्जनों लीकेज हैं, जहां एक दिन में हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। यह फोटो पार्षद नाजमीन अंसारी ने भेजा है।