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टायर, कबानी नहीं मिलने से डिपो में खड़ी हैं रोडवेज बसें, 3 मार्गों के यात्री ज्यादा परेशान

3 वर्ष पहले
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रोडवेज डिपो में ना सामान पूरा है ना सुविधाएं। हालत यह है कि रोडवेज बसों को चलाने लायक सामान भी डिपो के पास नहीं। टायर, कबानी, बैटरियों से लेकर सीट कवर तक उपलब्ध नहीं है या फिर किस्तों में थोड़ा-थोड़ा सामान मिल रहा है।

आठ रोडवेज बसें तो सिर्फ टायर और कबानी नहीं होने से वर्कशॉप में काफी समय से खड़ी हैं। छोटे-छोटे सामान के लिए भी वर्कशॉप को तरसना पड़ रहा है। इसका असर कई मार्गों पर पड़ा है, जिससे रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है। नैनवां, कोटा-बूंदी, केशवरायपाटन मार्ग पर इस वजह से दिक्कत आ रही है। रोडवेज डिपो में कहने को तो 86 बसे हैं, इनमें आठ खराब हैं। इनमें पांच बसें टायर-कबानी नहीं हाेने की वजह से खड़ी हैं तो तीन बसें सुधरवाने के लिए सेंट्रल वर्कशॉप अजमेर भेजी गई हैं। इसके अलावा बहुत सी बसों में बैटरियों की समस्या है। बैटरियां भी नहीं आ रही है, ऐसे में कई गाड़ियां धक्का स्टार्ट हैं या इधर-उधर जुगाड़कर चलाई जा रही है। जनवरी से कबानी, टायरों की प्रोपर सप्लाई नहीं मिल रही। पहले 12 रोडवेज बसें बंद थी, पर पिछले सप्ताह थोड़ा बहुत सामान आ जाने से चार बसों को ऑन रूट कर दिया गया।

नैनवां, कोटा-बूंदी और केशवरायपाटन मार्ग पर सबसे ज्यादा दिक्कत

बूंदी. बिना टायर के खड़ी रोडवेज बस।

कब डिपो शिफ्ट होगा, कब सुधरेगी दशा

रोडवेज बस स्टैंड की हालत किसी से छिपी नहीं है। यहां गड्ढे, गिट्टी, धूल-मिट्टी पसरी पड़ी है। शौचालय, प्रतीक्षालय की सफाई नहीं होती। सालों से रोडवेज डिपो की दशा सुधारने के लिए आवाज उठाई जाती रही है, पर हुआ कुछ नहीं। अब काम इसलिए नहीं हो रहा कि रोडवेज डिपो को पुरानी कृषि मंडी में शिफ्ट करने की योजना है। ऐसे में डिपो को अपने हाल पर छोड़ दिया गया। पर कृषि मंडी प्रशासन रोडवेज से अपनी जमीन की कीमत चाहता है और रोडवेज की हालत ऐसी नहीं कि रुपए चुकाए। रोडवेज बस स्टैंड की जमीन बेशकीमती है।

यह सही है कि बसों के लिए सामान नहीं मिल रहा। टायर, कबानी, बैटरियां और दूसरे सामान की दिक्कत आ रही है। कई दफा मार्ग में ही बसें खराब हो जाती हैं। सामान की कमी से बसों के नियमित संचालन में दिक्कत आ रही है। शादी-ब्याह का सीजन रोडवेज के लिए अच्छी कमाई का मौका होता है पर बसें खड़ी रही, इससे राजस्व का नुकसान हुआ। सवारियों को परेशानी होती है, मजबूरी में वे प्राइवेट बसों में सफर करती हैं या उन्हें इंतजार करना पड़ता है। हमारी कोशिश यही रहती है कि कम संसाधनों के बावजूद लोगों को रोडवेज सेवा मिलती रहे। -महेंद्रकुमार मीणा, प्रबंधक (संचालन) रोडवेज आगार, बूंदी

अब थोड़ा-थोड़ा सामान आने लगा है। हाल ही 10 टायर और 30 पत्ते मिले हैं। कोशिश है कि जल्द से जल्द डिपो में खड़ी बसों को मार्ग पर चलाया जाए। -विक्रमसिंह सोलंकी, रोडवेज डिपो मैनेजर

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