सिटी ऑफ पेंटिंग्स के नाम से दुनिया में मशहूर बूंदी में बच्चे गर्मियों की छुटिट्यों में रंगों से खेल रहे हैं। 50 के करीब बच्चे रोज सुबह आर्ट गैलेरी में आर्ट समर कैंप में शामिल हो रहे हैं, जहां बूंदी ब्रश संस्थान के नामी कलाकार उन्हें रंगों से खेलना सिखा रहे हैं।
कुछ ही दिनों की ट्रेनिंग में बच्चे कूंची और रंगों का ऐसा खूबसूरत संयोजन सीख गए हैं कि बड़े-बड़े उनकी कूंची की करामात देखकर दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर हो जाते हैं। बूंदी ब्रश के ये कलाकार इस तरह बूंदी की चित्रशैली के संरक्षण के लिए एक नई पीढ़ी तैयार कर रहे हैं। बूंदी ब्रश के सुनील जांगिड़, पंकज सिसोदिया और हरिसिंह भाटी कहते हैं, रंगों के जरिए वे बूंदी की पहचान को अगली पीढ़ी के जरिए और आगे ले जाना चाहते हैं। सुबह आठ से 11 बजे तक इन नन्हें चितेरों काे पेंटिंग्स की बारीकियां और रंगों का संयोजन सिखाते हैं। इनमें कार्टून से लेकर माडर्न आर्ट और बूंदी चित्र शैली की ट्रेनिंग शामिल है। आगे चलकर ये रंगों के ये नन्हें खिलाड़ी बूंदी चित्र शैली की चमक दुनिया में बिखेरेंगे।
समर कैंप
सिटी ऑफ पेंटिंग्स बूंदी की आर्ट गैलरी में समर कैंप का आयोजन, शिविर में 50 बच्चे ले रहे हैं भाग
बूंदी चित्रशैली में पहली बार नए प्रयोग: बड़े कलाकार बूंदी चित्रशैली में नए प्रयोग कर रहे हैं। बूंदी की ट्रेडीशनल शैली में मार्डन शैली को मिक्स कर एक नई शैली को जन्म दे रहे हैं, हालांकि इसमें मूल शैली खत्म होने की बजाए और निखर कर सामने आएगी। बूंदी ब्रश के अध्यक्ष सुनील जांगिड़ इन दिनों बूंदी चित्रशैली में पहली दफा नए प्रयोग कर रहे हैं।
माॅडर्न स्टाइल में खूबसूरत संयोजन
ये लघु चित्रों (मिनियेचर) काफी संवेदनशील होते हैं, जिनका रखरखाव बहुत सावधानी से करना पड़ता है। पानी की बूंद लगते ही ये खराब हो जाते हैं। इसकी जगह बड़े कैनवास पर परंपरागत शैली और माॅडर्न स्टाइल में खूबसूरत संयोजन किया जा रहा है। इसके लिए वे एक्रेलिक कलर इस्तेमाल कर रहे हैं। वे बताते हैं वे बूंदी चित्रशैली में जो नए प्रयोग कर रहे हैं, उनमें बड़ा कैनवास, चित्रों के बड़े आकार, एक्रेलिक कलर्स का इस्तेमाल शामिल है, हालांकि मूल चित्र शैली वही रहेगी। पर ये चित्र वाटरप्रूफ होंगे, बड़े कैनवास पर होने के कारण आम लोग ज्यादा बेहतर तरीके से चित्र देख पाएंगे।