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पीडब्ल्यूडी का नया प्रयोग, डामर में प्लास्टिक मिलाकर तैयार कर रहे सड़कें

3 वर्ष पहले
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डामर-पानी की बिल्कुल नहीं बनती, पानी में डामर पकड़ खो देता है। यही वजह है कि बारिश में या पानी भरता हो वे सड़कें बहुत जल्द टूट जाती है। उन्हें दोबारा बनाने पर हर साल करोड़ों रुपया खर्च होता है। लोग परेशान होते हैं सो अलग।

वर्ल्ड बैंक की मंशा के अनुरूप पीडब्ल्यूडी अब सड़क निर्माण में डामर में प्लास्टिक मिक्स कर नया प्रयोग कर रही है। ऐसी जिले में भी दो सड़कें इस नए प्रयोग से बनाई जाएंगी, जिनमें एक सड़क लाडपुर-सुंवासा और दूसरी पांडुला-रामगंज-बांसी है।

पीडब्ल्यूडी के एसई सुरेश बैरवा इसके फायदे बताते हैं। पानी की वजह से प्लास्टिक मिक्स डामर सड़क से पकड़ नहीं छोड़ेगा, साथ ही इसमें अतिरिक्त खर्च भी नहीं आएगा। सड़कें ज्यादा चलेंगी तो लोग परेशान नहीं होंगे और सड़कों पर पेचवर्क या री-कारपेटिंग भी जल्दी-जल्दी नहीं करानी पड़ेगी, जिससे पैसा कम खर्च होगा। बैरवा बताते हैं कि कुछ साल पहले भी प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में भी डामर में खराब रबर मिक्स कर काम में लिया गया था, पर गर्मियों में डामर के साथ रबर पिघलने लगता था। इस कारण यह प्रयोग कामयाब नहीं रहा था। प्लास्टिक क्योंकि गर्मी में भी पिघलता नहीं, उम्मीद की जा सकती है कि प्रयोग सफल होगा।

जिले की सड़कों पर बिछेगा कारपेट

राज्य सड़क निधि से जिले में 99 किमी लंबी 38 सड़कों पर डामर बिछाया जाएगा। 22.54 करोड़ रुपए खर्च होंगे, टेंडर हो चुके हैं, वर्कऑर्डर जारी होने वाले हैं।

आरआईडीएफ-24 योजना में नाबार्ड जिले में 133.50 किमी लंबी 48 सड़कों का डामरीकरण करेगी। इसके लिए 20.88 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार कर नाबार्ड को मंजूरी के लिए भिजवाई जा चुकी हैं।

पीएमजेएसवाई में बेहतर काम करने पर प्रदेश सरकार को मिले इन्सेंटिव के पैसे से जिले में भी 259 किमी लंबी सड़कों का डामरीकरण होगा। प्रस्ताव भिजवाए जा चुके हैं, जल्द मंजूर होंगे।

जिले में राज्य मद से 46 किमी लंबी नई सड़कें भी बनेंगी। इन पर 27.57 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इनमें मिसिंग लिंक सड़कें शामिल हैं। टेंडर कुछ दिनों में खुल जाएंगे।

जिले में शेष बचे 47 किमी के 47 गौरव पथ के प्रस्ताव भिजवाए जा चुके हैं, जल्द मंजूर हो जाएंगे। इन पर 28.20 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

काली मिट‌्टी में चूना मिलाकर बनाई जा रही 4 सड़कें: इसी तरह परीक्षण के तौर पर कुछ सड़कों में मिट्टी के साथ चूना इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसी जिले में चार सड़कें बनाई जा रही हैं। इनमें माधोराजपुरा से जाखरूंड, संपर्क सड़क नोताड़ा, कोड़क्या-खेड़ली बंधा और ईसरदा-चरड़ाना। चूना मिलाने से काली मिट्टी की प्रोपर्टी सुधर जाती है। इन सड़कों का काम चालू है। पीडब्ल्यूडी एसई ने बताया कि 20 साल पहले वीजी-10 यानि 80 बाई 100 ग्रेड का डामर इस्तेमाल होता था, जिसमें सॉफ्टनेस ज्यादा होती थी, जो गर्मी में पिघल जाता था। बाद में वीजी-30 60 बाई 70 ग्रेड का डामर इस्तेमाल किया जाने लगा जो थोड़ा हार्ड होता है। इससे सड़कों पर डामर गर्मी में पिघलता नहीं। ये काम आरआरएसएमपी कर रही है।

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