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एक-एक कर दम तोड़ रही गोशाला की गायें, फूड पॉइजनिंग होने की संभावना

3 वर्ष पहले
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बांसी रोड स्थित श्रीचारभुजा गौशाला में पिछले एक सप्ताह में 4 गायें काल का ग्रास बन चुकी है। गायों की सिलसिलेवार मौत का मामला सामने आने पर रविवार को हिंदु सेना के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन कर गायों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए देई थानाधिकारी को ज्ञापन भी दिया। दोपहर बाद पशु चिकित्सालय की टीम गौशाला में पहुंची और तीन मृत गायों का पोस्टमार्टम कर सैंपल लिए, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। वैसे गायों की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगा, लेकिन प्रथम दृष्टया पोस्टमार्टम के दौरान गायों के पेट में पत्तल, दोने आदि मिले है। ऐसे में फूड पॉइजनिंग को मौत का कारण माना जा रहा है।

गौशाला में मौजूद गायों की स्थिति में बेहद नाजुक है। ना तो यहां उनके खाने के लिए हरा चारा है और ना ही पानी की कोई खास व्यवस्था है। सूचना मिलने पर नैनवां तहसीलदार गजराजसिंह व पटवारी भी गौशाला में पहुंचे और वस्तुस्थिति की जानकारी ली। गौशाला में गायों की मौजूदगी को लेकर भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। गौशाला का संचालन करने वालों का कहना है कि गौशाला में 34 गायें मौजूद थी, जिनमें से चार की मौत हो चुकी है।

सप्ताह में 4 गायों की हो चुकी है मौत, चारा-पानी भी नहीं

देई. गायों की मौत के मामले में जांच करने पहुंचे प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी

इलाज करवाया जाता तो बच सकती थी गायों की जान

हिंदु सेना के पदाधिकारियों का कहना था कि गौशाला में शनिवार रात को तीन गायें मरणासन्न स्थिति में थी। इलाज नहीं मिल पाने के कारण इन गायों की मौत हो गई। यदि संचालन करने वाले समय पर पशु चिकित्सकों को बुलाकर गायों का उपचार करवाते तो गायें बच जाती है, लेकिन बीमार गायों पर ध्यान नहीं दिया गया। रविवार को गायों की मौत की सूचना मिलने पर हिंदू सेनाध्यक्ष हेमंत बैरवा के नेतृत्व में पदाधिकारी वहां पहुंचे और स्थिति को देखने के बाद थानाधिकारी को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की।

यह लिखा है ज्ञापन में: ज्ञापन में लिखा कि गौशाला में दूसरी गायों की स्थिति भी काफी नाजुक बनी हुई है। मृत गोवंश अधजले हुए थे। मृत गायों के शवों को कुत्ते नौंच रहे थे। सूचना पर पुलिस व पशु चिकित्सालय टीम वहां पहुंच गई, लेकिन संचालन करने वाले पदाधिकारी नहीं आए, जो उनकी लापरवाही को दर्शाता है। ऐसे में गायों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ज्ञापन देने वालों में करण सिंह, योगेंद्र महावर, कमल कहार, इंद्रजीत महावर, शानू शर्मा, सुनील कहार, फौरूलाल सैनी, मनीष वैष्णव, विकास नागर, गोलू योगी, शिवा पाराशर आदि शामिल थे।

गौशाला में पहुंचे उस दौरान वहां तीन गायें मृत पड़ी हुई थी। इनमें से संभवतया दो की मौत शनिवार रात व एक की मौत रविवार को हुई है। तीनों मृत गायों का पोस्टमार्टम कर सैंपल जांच के लिए भेज दिए है। वहां से रिपोर्ट आने पर ही वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। प्रथम दृष्टया गायों की मौत फूड पॉइजनिंग से हुई है। -डॉ. मुकेश कुमार, पशु चिकित्सक, देई

गायों में 34 गायें थी, जिनमें से चार गायों की मौत हुई है। तीन गायों के शवों का रविवार को पोस्टमार्टम करवाया गया है। एक गोवंश की मौत पिछले दिनों हुई है। गौशाला में चारे-पानी की व्यवस्था है। गायों को घुमाने के लिए बाहर ले जाया जाता है। सीएम आने के दौरान गौशाला की दीवार तोड़ी गई थी। टूटी हुई दीवार से गायें बाहर निकल जाती है। संजयकुमार जैन, अध्यक्ष, श्रीचारभुजा गौशाला देई

सूचना मिलने पर गौशाला पहुंचा तो देखा कि चारे पानी की व्यवस्था होने के बावजूद वहां गायों काफी कमजोर स्थिति में है। कस्बे में घूमने वाली आवारा गायों को ही गौशाला में शिफ्ट किया गया था। मृत मवेशियों के डालने के लिए वहां खुदे हुए गड्ढे में छह गायें मरी हुई थी, जिनमें से दो गायों के टेग लगा हुआ था। ये दोनों गायें गौशाला की नहीं है। गोवंश के शवों को जलाने जैसी कोई बात नहीं मिली। अध्यक्ष व चौकीदार को बुलाकर पाबंद कर दिया गया है कि वे गोवंश के स्वास्थ्य का ध्यान रखे। गजराजसिंह, तहसीलदार, नैनवां

चारे को पचा नहीं पा रही है गायें

गोशाला में गायों के लिए सूखा चारा पड़ा हुआ है। हालात यह है कि इस चारे को गायें पचा ही नहीं पा रही है। भूखी होने के कारण गोवंश काफी कमजोर स्थिति में है। गोशाला में पानी के लिए मात्र एक खेळ भरी हुई थी। पोस्टमार्टम के दौरान गायों के पेट में पत्तल, दोने का मिलना गंभीर मामला है। पशु चिकित्सा विभाग भी प्रथम दृष्टया फूड पॉइजनिंग को ही गायों की मौत का कारण मान रहा है।

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