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मोहरे इधर-उधर करने से नतीजे नहीं बदल जाएंगे:तिवाड़ी

3 वर्ष पहले
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पूर्व शिक्षामंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी के इस्तीफे पर कटाक्ष किया और कहा कि ये मोहरे हैं, मोहरों को इधर-उधर कर देने से विधानसभा चुनावों में भाजपा की दशा पर फर्क नहीं पड़ने वाला। राजस्थान की राजनीति में इसका कोई मतलब नहीं है। तिवाड़ी परशुराम जयंती समारोह में बुधवार को भाग लेने बूंदी आए थे। सर्किट हाउस में शाम को बुलाई प्रेस काॅन्फ्रेंस में उन्होंने ये आरोप लगाए। परशुराम जयंती पर सार्वजनिक अवकाश को उन्होंने चुनावी झुनझुना करार दिया।

अपनी खुली चोटी दिखाते हुए तिवाड़ी ने कहा कि 18 महीने से इसमें गांठ नहीं लगाई, तभी लगाऊंगा, जब संकल्प पूरा होगा। तिवाड़ी ने बताया कि जल्द ही भारत वाहिनी पार्टी की घोषणा कर रहे हैं, राज्यस्तर पर ढांचा तैयार हो चुका है। जून में प्रतिनिधि सम्मेलन के बाद तय करेंगे कि पार्टी सभी 200 विधानसभा सीटों पर लड़ेगी या कम पर, उनकी पार्टी मित्र दलों से गठबंधन करेगी। भाजपा से सुलह का कोई रास्ता? पूछने पर जवाब में तिवारी ने कहा मैंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भी चिट्‌ठी लिखी थी, पर जवाब नहीं आया।

आखातीज पर नोटों की किल्लत केंद्र सरकार की बड़ी नाकामी

पूर्वमंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने अब केंद्र सरकार पर भी हमलावर रुख अपनाते हुए कहा कि आखातीज जैसे बड़े सावे पर देश में कैश की किल्लत केंद्र सरकार की नाकामी है। नोटबंदी पर उन्होंने केंद्र सरकार से श्वेतपत्र या स्टेटस पेपर जारी करने की मांग करते हुए कहा कि इसमें बताया जाए कि नोटबंदी क्यों की गई, इसके क्या लाभ-नुकसान हुए, जनता पर क्या असर पड़ा, यह कितनी सफल-असफल रही और इसके लिए दोषी कौन है? नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था, खेती, व्यापार, उद्योग, रायल स्टेट बर्बाद हो गए, लाखों लोग बेरोजगार हो गए? आतंकवाद और कालाधन खत्म करने के नाम पर नोटबंदी की गई, पर इसका उल्टा असर पड़ा।

चिर परिचित अंदाज में चोटी दिखाते तिवाड़ी।

आरोप-सरकार ने अटका रखा है आर्थिक आधार पर आरक्षण

तिवाड़ी ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत करते हुए कहा कि आरक्षण ऐसा हो, जो सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय हो। एससी-एसटी, ओबीसी, एसबीसी का आरक्षण यथावत रहे और ब्राह्मण, राजपूतों, वैश्यों और कायस्थों को भी 14 प्रतिशत आरक्षण मिले। इसकी लड़ाई वे 14 साल से लड़ रहे हैं। उन्होंने विधानसभा में इसे तय भी करवा लिया था, फिर गहलोत ने इसे खत्म कर दिया, वे चार साल पहले फिर इस बिल को लाए, बिल पास हो गया। राज्यपाल के हस्ताक्षर भी हो गए, पर सरकार इसे दबाए बैठी हैं। अब वे सामाजिक समरसता और आर्थिक न्याय के लिए लड़ते रहेंगे।

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