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अधिवक्ता संघ का मानना- फोरम सदस्यों को फैसला देने का अधिकार न्यायसंगत नहीं

3 वर्ष पहले
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जिला अधिवक्ता संघ ने रजिस्ट्रार को ज्ञापन भेजकर उपभोक्ता सदस्यों से अधिकार वापस लेने की मांग की

भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

जिला उपभोक्ता फोरम में पदस्थ सलाहकार सदस्यों को मप्र राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग भोपाल के रजिस्ट्रार द्वारा 26 फरवरी 18 को जारी परिपत्र में फोरम के अध्यक्ष पद के कर्तव्यों के निष्पादन वरिष्ठ सदस्य द्वारा किए जाने संबंधी पारित आदेश से स्थानीय जिला अधिवक्ता संघ के सदस्य संतुष्ट नहीं हैं।

संघ सदस्यों का मानना है जिला उपभोक्ता फोरम न्यायालय बुरहानपुर पदस्थ सदस्य सुमित्रा हाथीवाला और मेधा भिड़े को कानून की प्रक्रिया का इतना ज्ञान और अनुभव नहीं है कि वह उपभोक्ता फोरम अध्यक्ष के अर्धन्यायिक कर्तव्यों का निर्वहन कर सके। रजिस्ट्रार हरेंद्रसिंह को जारी पत्र में अधिवक्ता संघ अध्यक्ष राजेश कोरावाला, सचिव विनय शाह ने ज्ञापन प्रेषित करते हुए उल्लेखित किया है कि कानून की मंशा अनुसार जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष पद पर जिला एवं सत्र न्यायालय से सेवानिवृत्त हुए अथवा उसके समकक्ष न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति होती है और वे समाज के दीर्घ अनुभवी कानून की बारीकियां समझने वाले दो सदस्यों को साथ लेकर प्रकरणों का निराकरण किया जाता है, लेकिन बुरहानपुर फोरम में पदस्थ दोनों सदस्य विभिन्न सामाजिक, राजनैतिक संगठनों से संबंध महिलाएं हैं। और उनसे निष्पक्ष न्याय की अपेक्षा नहीं की जा सकती है। सचिव विनय शाह ने कहा कि वरिष्ठ सदस्य सुमित्रा हाथीवाला बीजेपी संगठन की पूर्व पार्षद रही होकर विभिन्न पदों पर अासिन है तथा मेधा भिड़े लायनेस क्लब, रेडक्रास सोसायटी, बाल कल्याण समिति तथा अन्य कई सामाजिक संगठनों की सदस्य हैं। दोनों ही सदस्यों की सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी होने से उनसे निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती। ज्ञापन में अध्यक्ष पद की शीघ्र नियुक्ति की जाने की मांग गई है। जब तक न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति नहीं होती तब तक दोनों महिला सदस्यों को प्रदत्त किए निर्णय पारित करने के अधिकार पर रोक लगाई जानी चाहिए।

हम भी चाहते है अध्यक्ष की नियुक्ति शीघ्र हो

फोरम सदस्य मेधा भिड़े ने कहा शासन ने वरिष्ठता के आधार पर हमें बैठाया है। हम भी चाहते है कि फोरम अध्यक्ष की नियुक्ति शीघ्र हो निर्णय पारित होने पर एक पक्ष का असंतुष्ट होना स्वाभाविक है। स्थानीय नियुक्ति से हमें भी संतुष्टि नहीं है अगर अन्य जिलों में नियुक्ति करते तो ज्यादा बेहतर होता।

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