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चेक बाउंस मामला धारा 138 में महिला को 1 साल की जेल व 78.40 लाख रुपए जुर्माना

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | बुरहानपुर

चेक बाउंस मामले में अदालत ने धारा 138 निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के अपराध मे महिला आरोपी को 1 साल के कठोर कारावास के साथ 78 लाख 40 हजार रुपए के प्रतिकर से दंडित किया है। यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम राजेन्द्र कुमार पाटीदार ने आरोपी को दोषी पाते हुए सुनाया।

मामले में शासन की ओर से पैरवी कर रहे लोक अभियोजक श्याम देशमुख ने बताया कि जिले के आबकारी विभाग ने वर्ष 2015-16 मे देशी विदेशी शराब दुकान का टेंडर निकाला था। इसमें भीकनगांव निवासी पूनमबाई पति अमित जायसवाल (29) ने ठेके की सर्वाधिक बोली 5 करोड़ 48 लाख 65 हजार 640 रुपए लगाई। इसका टेंडर जिला समिति ने स्वीकार कर लिया। आरोपी को चौक बाजार की विदेश शराब दुकान, कारंज बाजार की दुकान, इतवारा गेट की शराब दुकान दी। आरोपी महिला ने नियत तारीख तक बेसिक अवशेष व लाइसेंस फीस शासकीय मद में जमा नहीं की। इस कारण उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। दुकानों का संचालन आबकारी विभाग ने किया। दुकानों के दोबारा टेंडर निकाले गए। इसमें शासन को 64 लाख 78 हजार 111 रुपए का नुकसान हुआ। इसकी उक्त राशि आरोपी से लेना बकाया थी। रुपए वसूली के लिए आबकारी विभाग ने आरोपी को लिखित सूचना दी। आरोपी ने राशि अदा नहीं की। उसके द्वारा विभाग के पक्ष में दिए गए दो चेक 45 लाख 72 हजार 580 रुपए के दिए थे, जिसे भुगतान प्राप्ति के लिए आबकारी विभाग ने आरोपियों के बैंक खाते में प्रस्तुत किए। आरोपी के खाते में रुपए नहीं होने के कारण दोनों चेक बाउंस हो गए। आरोपियों से रुपए वसूली के लिए क्षतिपूर्ति की बकाया राशि 64 लाख 13 हजार 966 रुपए की राशि की अदायगी के लिए सूचना पत्र भेजा गया। आरोपी द्वारा कोई जवाब नहीं दिया और न ही बकाया राशि का भुगतान किया गया। आरोपी महिला के खिलाफ कोर्ट में धारा 138 के तहत परिवाद प्रस्तुत किया गया। अदालत ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी महिला को धारा 138 एनआईए मे दोषी पाते हुए 1 साल के कठोर कारावास तथा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357 के तहत परिवादी को 78 लाख 40 हजार रुपए प्रतिकर देने के लिए आदेशित किया।

जज ने कहा- महिलाओं को आगे कर चालाक लोग अपनी चालाकियों से शासन की नीतियों को असफल कर राजस्व का नुकसान नहीं पहुंचा सकते

जज की टिप्पणी : सामाजिक चेतना को धक्का लगेगा

फैसले में अदालत ने यह भी लिखा कि यदि ऐसे अपराधों में कम सजा दी गई तो अपराधियों को प्रोत्साहन मिलेगा व उसका फल समाज को भुगतना पड़ेगा। सामाजिक हित एवं सामाजिक चेतना को भी धक्का लगेगा। ऐसे अपराधियों के प्रति सजा में नरमी बरती गई और परीविक्षा का लाभ देेकर छोड़ दिया जाएगा तो निश्चित रूप से अपराधियों का मनोबल बढ़ेगा तथा चालाक लोग चालाकियाें से शासन की नीतियों को असफल करने के आदि हो जाएंगे। जानबूझकर शासन को बड़ी मात्रा में राजस्व का नुकसान पहुंचाएंगे।

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