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सीवरेज लाइन के लिए खोदे गड्ढे, वहां बननी थी 20 करोड़ रु. से सड़क, अब सिर्फ गड्‌ढे ही भरेंगे

3 वर्ष पहले
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अमृत योजना के तहत सीवर लाइन बिछाने के बाद जिन क्षेत्रों में गड्‌ढे किए गए उन क्षेत्रों के खुदे सीसी, डामर या मुरम रोड जैसे पहले थे उसी स्थिति में लाने के लिए एक कोने से दूसरे कोने तक नया रोड बनाना है। जिसके लिए योजना में ही 20 करोड़ रु. मंजूर किए हैं। उस राशि से निगम अब सिर्फ गड्‌ढे भरवाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए एक दर्जन वार्डों का सर्वे हो गया है। इसका प्रतिवेदन निगमायुक्त तक पहुंचा चुका है। कांट्रेक्टर भी सीवर के गड्‌ढे भरने को राजी हो गया है।

अमृत योजना के तहत 131.49 करोड़ की जल आवर्धन व 83 करोड़ रु. की सीवर लाइन स्वीकृत हुई। जिसे शहरभर में एक साथ शुरू कराने के लिए नेता, मंत्री ने भोपाल तक एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। जिसमें अंकिता कंस्ट्रक्शन को सीवर लाइन बिछाकर नया रोड बनाने के लिए 20 करोड़ व जलावर्धन लाइन बिछने पर जेएमसी कंपनी को 30 करोड़ रु. रोड निर्माण के लिए स्वीकृत किए। ये राशि कुल लागत के अंदर से निकाली गई है। जिसका वर्ल्ड बैंक व नगरीय प्रशासन से नगर निगम का अनुबंध है। जिसके बाद मंत्री अर्चना चिटनीस व महापौर अनिल भोसले ने मंच से दावा किया था कि जलावर्धन व सीवर लाइन एकसाथ बिछेगी। पीछे-पीछे ठेकेदार रोड बनाते जाएंगे। निगम सम्मेलन में भी महापौर ने कहा पूरा रोड बनेगा लेकिन अब ये दावे उलटे पड़ गए हैं। सहायक आयुक्त कमलेश पाटीदार ने कहा आयुक्त के निर्देश थे कि जिन क्षेत्रों में सीवर लाइन बिछ चुकी है, उन क्षेत्रों के गड्‌ढों की फिलिंग की जाना है। जिसका निरीक्षण कर मैंने रास्तीपुरा, प्रतापपुरा, नेहरु नगर, महाजनापेठ, सरस्वती नगर, सुंदर नगर, संजय नगर, लक्ष्मीनगर, राजीव नगर, शिकारपुरा में सीवर का काम देखा। नगरीय प्रशासन ने दोनों काम पर निगरानी रखने के लिए नगर निगम आयुक्त व एई को अधिकार दिया है। जैसे-जैसे काम होता जाएगा, निर्माण एजेंसी आयुक्त को दिखाएगी। पत्र लिखकर आयुक्त शासन को काम से अवगत कराएंगे। उनके पत्र पर ही राशि निगम को मिलेगी। ऐसे में राशि अटकने का भी खतरा है।


जवाब ये- पैसे बचे तो बनाएंगे रोड
चेंबर बना रहे। दुर्घटना से बचने के लिए मिट्‌टी से गड्‌ढे ढक रहे।

वर्ल्ड बैंक और नगरीय प्रशासन से नगर निगम के हुए अनुबंध के तहत जहां रोड खुदे, उन क्षेत्र के रोड का एक कोने से दूसरे कोने तक पूरा निर्माण किया जाना है। अब जिम्मेदार कह रहे-पैसे बचे तो बनाएंगे रोड।

बारिश में होगी परेशानी
आगामी डेढ़ माह बाद जून से बारिश की शुरुआत होगी। जिसमें सीवर के गड्‌ढों की मिट्‌टी पूरी तरह बहेगी। इसके बाद गड्‌ढे निकल आएंगे, जिससे दुर्घटना का आंकड़ा बढ़ेगा और नागरिकों का आक्रोश भी फूटेगा।

मतदाता बिखरने का डर
2018 के अंत तक विस चुनाव होना है। जिसमें नेताओं को मतदाता बिखरने का डर है। इसे नेता, मंत्री अभी से भांप चुके हैं। इसलिए उन्होंने प्लान बदल दिया है। विपक्ष के कुछ नेता उनका साथ दे रहे हैं।

जलावर्धन से आगे निकली सीवर लाइन
शहर के एक दर्जन से ज्यादा वार्डों में सीवर लाइन बिछ चुकी है। लगभग 25 प्रतिशत हिस्से में सीवर लाइन बिछाकर चैंबर बने हैं। अब घर-घर के सीवर कनेक्शन इससे जोड़े जाना बाकी है। इधर जेएमसी कंपनी पानी की पाइप के लिए गड्‌ढे तक खुदवा नहीं पाई है। जबकि सीवर का काम जलावर्धन से बहुत आगे निकल चुका है। इस अंतर के बाद दोनों काम एक साथ पूरे होते नहीं दिख रहे।

पैचवर्क शुरू करेंेगे
25% वार्डों में काम हो चुका है। जितना तोड़ा उसका एक सप्ताह में पैचवर्क शुरू करना है। पूरा रोड नहीं बनाना है। -संदीप चौधरी, इंजीनियर, अंकिता कंस्ट्रक्शन

फिलहाल गड्‌ढे भरेंगे

रोड बनाने के लिए पैसे मिले हैं। खुदे गड्‌ढों को भर देंगे। उसके बाद दोनों काम खत्म होने पर बची राशि से रोड बनाएंगे। -अनिल भोसले, महापौर

इधर देवास शहर का उदाहरण... लोग विरोध में उतरे तब बनी सड़क
देवास में भी करीब दो साल से सीवरेज लाइन का काम चल रहा है। निर्माण कंपनी पक्की रोड खोदकर बीच सड़क पर लाइन डाल रही है लेकिन तत्काल रोड नहीं बना रही है। पूरे शहर की सड़कों की हालात इतनी बदतर हो गई है कि वाहन तो दूर लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया था। नगर निगम व नेता भी रोड बनाने का दबाव नहीं डाल सके। मजबूरी में देवास शहर के लोगों को आगे आना पड़ा। लोगों ने काम रुकवा दिया। लोगों ने कहा पहले खोदी सड़कें बनाओ। इसके बाद काम शुरू होगा। कंपनी को सड़क बनाने को मजबूर होना ही पड़ा।

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