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समग्र शिक्षा अभियान के तहत पहाड़ी इलाके में खुलेंगे स्कूल

3 वर्ष पहले
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वर्ष 2018 शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव का साल है। स्कूलों के विलय के बाद अब विभागों के विलय की प्रक्रिया का प्रारूप भी तैयार हो गया है। इसी क्रम में सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए), शिक्षक प्रशिक्षण डायट केंद्रों का विलय कर ‘समग्र शिक्षा अभियान’ यानी (एसएसए) बनाया गया है। इसके माध्यम से विभिन्न गतिविधियों का क्रियान्वयन होगा। इस योजना से कम आबादी, पहाड़ी और घने जंगल वाले इलाके या ऐसे क्षेत्र जहां विद्यालय नहीं हैं वहां स्कूल खोले जाएंगे। स्कूलों में परिवहन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। प्रति बच्चा प्रति वर्ष 6000 रुपए कक्षा 8वीं तक दिया जाएगा। नीति आयोग के निर्देश पर केंद्रीय मानव संसाधन विभाग ने यह निर्णय लिया है। अब समग्र शिक्षा अभियान ही सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 12वीं तक के विद्यार्थियों, स्कूलों की आधारभूत संरचना समेत सभी चीजें नियंत्रित करेगा। बजट भी अब समग्र शिक्षा अभियान के तहत तैयार होगा। नई योजना के तहत अब मुख्य शिक्षा अधिकारी एकीकृत योजना से संबंधित कार्यों का निष्पादन करेंगे। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जिला स्तर पर सभी अभिलेखों का अध्ययन करने और वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है।

विज्ञान को प्रोत्साहित करने के लिए चलेगा आविष्कार अभियान, विलय के बाद सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान का स्वरूप व उद्देश्य भी तय किए

समग्र शिक्षा अभियान के तहत ही अपग्रेड होंगे स्कूल

समग्र शिक्षा अभियान के तहत ही नए स्कूलों की स्थापना और पुराने को अपग्रेड किया जाएगा। इसके साथ ही नए उच्च प्राथमिक स्कूलों को 10 लाख रुपए प्रति स्कूल और नए माध्यमिक स्कूल के लिए प्रति स्कूल 25 लाख रुपए दिए जाएंगे। वहीं उच्चतर माध्यमिक स्कूल में एक संकाय के लिए 50 लाख, दो के लिए 55 और तीन संकाय के लिए 70 लाख रुपए मिलेंगे। वहीं अतिरिक्त संकाय के लिए प्रतिवर्ष 15 लाख रुपए का अनुदान दिया जाएगा। प्री-नर्सरी स्कूल के लिए दो लाख रुपए तक का अनुदान मिलेगा।

शिक्षा अभियान का उद्देश्य : गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के सीखने के परिणाम में वृद्धि करना। स्कूल शिक्षा में सामाजिक और लैंगिक गैप भरने का प्रयास करने के साथ ही स्कूलिंग प्रावधानों में न्यूनतम मानक तैयार कर व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देना। साथ ही सभी स्तर पर आरटीई का लागू कराना है।

यह भी होगा

पहली से 12वीं कक्षा तक मूल्यांकन एनसीईआरटी के आधार पर होगा।

गणित और विज्ञान के प्रोत्साहन के लिए कक्षा छठी से 12वीं में राष्ट्रीय आविष्कार अभियान चलेगा।

शिक्षा के उपयोग व गुणात्मक सुधार के लिए इनोवेशन को बढ़ावा दिया जाएगा।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को छठी से आठवीं तक 60 लाख, छठी से 10वीं तक 80 लाख और छठी से 12वीं तक एक करोड़ का वार्षिक अनुदान निर्धारित होगा।

कक्षा छठी से 12वीं तक की छात्राओं के लिए तीन माह का सेल्फ डिफेंस कार्यक्रम।

जिलास्तर पर 21 अप्रैल तक तैयार करना है बजट

समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिला स्तर पर बजट तैयार करने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विभाग ने 21 अप्रैल तक का समय दिया है। राज्य को बजट तैयार कर 15 मई तक केंद्रीय मानव संसाधन विभाग को भेज देना है।

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