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नमाजियों ने रोजा मुक्कमल करने की दुआ मांगी

3 वर्ष पहले
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शहर के चारों मस्जिदों में रमजान उल मुबारक का पहला जुम्मा को नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। भीड़ इतनी थी कि मस्जिदों में नमाजियों के लिए जगह कम पड़ गई। इस वजह से नमाजियों को मस्जिदों के बाहर सड़कों पर भी नमाज अदा करनी पड़ी। पहला जुमे को भीड़ की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना को लेकर सुबह 10 बजे से ही नमाजियों का रूख मस्जिदों की ओर देखा गया। जामा मस्जिद में मौलाना मो. ताहा हुसैन, सदर बाजार मस्जिद में कारी अब्दुल कुद्दुस, रजा ए मदीना मस्जिद में हाफिज मो. मुख्तार और मस्जिद ए अासरा में हाफिज मसूद फरीदी ने नमाज अदा कराई। इस मौके पर सभी मस्जिदों के इमामों ने रमजान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए नमाजियों को अल्लाह व रसूल के बताए रास्ते पर चलने को कहा। रमजान रहमज, बरकत और मगफिरत का महीना है। इसमें एक नेकी का सबाव सत्तर मिलता है। इसमें अल्लाह जन्नत के दरवाजे खोल देता है और जहन्नम का दरवाजा बंद कर देता है। इसमें हर मांगने वाले का मुराद पूरी होती है। इस माह में फितरा और जकात के पैसे हर गरीब ओर असहाय लोगों के बीच बांटा जाता है। ताकि वह भी ईद की खुशी में सभी के साथ मिलकर शामिल होकर ईद की खुशी मना सके। इसलिए इस महीने को सबसे अफजल माना जाता है।

अकीदत के साथ अदा की गई नमाज

मस्जिद अल्लाह का घर, ना करें बेअदबी: मौलाना आसिफ

चंपुआ| रमजानुल मुबारक के पहले जुमा को जैंतगढ़ जामा मस्जिद सहित, चंपुआ बस्ती, अलीनगर, मौलाना गोड़ा, जगन्नाथपुर, जोड़ा, बड़बिल, झूम्पूरा एंव जामुदलक आदि मस्जिदों मे जुमा के नमाज के लिए काफी भीड़ रही। अकीदत के साथ जुमा की नमाज अदा की गई। जैंतगढ़ मे महिलाएं भी जमाअत के साथ जुमा की नमाज अदा की। सबों ने अल्लाह से गिड़गगिड़ा कर अपने गुनाहों की माफी मांगी। रोजेदारों ने अल्लाह से पूरे रमजान मे गर्मी से राहत और खुशगवार मौसम के साथ रोजा मुकम्मल करने की दुआ की। नमाज के बाद मस्जिदें कुरान पाक की तिलावत से गूंजती रही। बड़े बुजुर्ग एंव बच्चों ने भी कुरआन की खूब तिलावत की। जैंतगढ़ जामा मस्जिद के इमाम व खतीब मौलाना आसिफ ने जुमा के खुतबे में मस्जिद की अहमियत और आदाब को बयान करते हुए कहा कि मस्जिद अल्लाह का घर है। इसका एहतराम करना चाहिए। मस्जिद में शोर व गुल तथा दुनिया की फुजूल बातें ना करें। आज युवा पीढ़ी मस्जिदों के सेहन, वजुखाने तथा ऊपरी तल्ले मे दुनियावी बातों मे मशगूल रहते हैं। इससे मस्जिद की बेहुरमती होती है। मस्जिद अल्लाह का घर है। इसकी बेअदबी ना करें।

नमाज अदा करता जियान।

7 साल के जियान ने रखा 15 घंटे का रोजा

जैंतगढ़ निवासी काशिफ रजा के 6 वर्षीय पुत्र जियान काशिफ ने शुक्रवार को पूरे एहतेमाम के साथ 15 घंटे का रोजा मुकम्मल किया। इतना ही नहीं उसने पाबंदी के साथ नमाज भी अदा की। अल्लाह से अपने इल्म की तरक्की के लिए दुआ मांगी। प्रचंड गर्मी के बावजूद उसने अल्लाह के लिए 15 घंटे तक भूख व प्यास बर्दाश्त किया। जियान इस्लामिक इंग्लिश मीडियम स्कूल में कक्षा तीन का छात्र है। कहा- रोजा रखने की प्रेरणा मम्मी-पापा और दादा-दादी से मिली।

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