बारिश के बीच मांदर की थाप पर थिरके विद्यार्थी
टाटा कॉलेज परिसर में बुधवार को कोल्हान दिशुम मागे जुमूर का आयोजन समारोहपूर्वक किया गया। इस दौरान पारंपरिक लिबास में टाटा कॉलेज के अलावा विभिन्न कॉलेजों के छात्रों ने दमा-दुमुंग की थाप पर पारंपरिक मागे नृत्य प्रस्तुत कर समारोह को और भी आकर्षक बना दिया। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत दिउरी अर्जुन पूर्ति द्वारा कॉलेज परिसर में बने देशाउली में पूजा-अर्चना कर की गई। देशाउली की पूजा खत्म होते ही अतिथियों के आगमन शुरू हो गया। हालांकि बारिश होने के कारण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद कोल्हान यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ शुक्ला महंती ने समारोह की सराहना करते हुए कहा कि मनुष्य को अपनी परंपरा नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि माघे पर्व को मनाने का रिवाज आदिकाल से चला आ रहा है। लिहाजा कॉलेज के छात्र भी इस परंपरा को बनाए रखने के लिए हर साल इस तरह का समारोह करते हैं। इससे हो आदिवासी समुदाय के पारंपरिक रिवाज की जानकारी भी मिलती है। उन्होंने कहा हर पारंपरिक रिवाज के पीछे कुछ न कुछ विज्ञान छिपा होता है।
टाटा कॉलेज में धूमधाम से मना मागे पर्व, देशाउली की पूजा-अर्चना के बाद कार्यक्रम शुरू, केयू की वीसी हुईं शामिल
समारोह के अंत में सामूहिक भोजन का उठाया आनंद
समारोह के अंत में लोगों ने सामूहिक भोज का आनंद उठाया। इस अवसर पर केयू के प्रोक्टर एके झा, टाटा कॉलेज की प्राचार्या प्रोफेसर कस्तूरी बोयपाई, कॉलेज के पूर्व छात्र व पूर्व विधायक बड़कुंवर गागराई, कांग्रेस जिला अध्यक्ष सन्नी सिंकू, भूषण पाट पिंगुवा प्रोफेसर केएन प्रधान मौजूद थे।