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बच्चे परंपरा-संस्कृति के माध्यम से शिक्षा ग्रहण करें: बिलुंग

3 वर्ष पहले
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जनजातीय बच्चे अपने परिवेश में मिलने वाली परंपरा व संस्कृति से जुड़े चीजों के माध्यम से शिक्षण ग्रहण करें, इसी उद्देश्य को लेकर जिले में संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है। उक्त बातें खूंटपानी प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय करकट्टा में आयोजित हो जनजातीय जीवन दर्शन पर आधारित संग्रहालय का उदघाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक अरविन्द विजय बिलुंग ने कही। संग्रहालय में हो जनजातीय जीवन में जन्म से मरण तक उपयोग किए जाने वाली वस्तुओं का संग्रह रखा गया है। मौके पर तांतनगर और सदर के पूर्व बीइइओ ने कहा कि परंपरा बदल सकती है लेकिन संस्कृति को बदला नहीं जा सकता है। इसलिए न बदलनी वाली संस्कृति को विलुप्त होने से बचाया जाए। संग्रहालय उदघाटन कार्यक्रम को समारोह का रूप देने में जिले के हो लोक गीत गायक व शिक्षक संजय कुमार जारिका, विद्यासागर लागुरी व राजेन्द्र बिरूवा ने अपनी मनमोहक गायकी से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। वहीं पेटापेटी स्कूल के बच्चे बच्चे-बच्चियों ने मागे, बाहा, हेरो और शादी नृत्य से दर्शकों को झुमाया। इससे पूर्व अतिथियों का पारंपरिक विधि विधान से स्वागत किया गया। मुख्य अतिथि बिलुंग द्वारा हो जनजाति के वारंगक्षिति लिपि के जनक कोल लाको बोदरा की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संग्रहालय का उदघाटन किया गया। इस मौके पर चक्रधरपुर के आरइओ रामपति राम, बीइइओ तेजिन्दर कौर, तांतनगर के बीइइओ श्रीकांत ठाकुर, सदर के पूर्व बीइइओ विपिन कुमार लाल दास, खूंटपानी के बीइइओ नागदेव यादव व बरकेला पंचायत के मुखिया सबिनुस सुंडी, सीआरपी सुब्रत चन्द्र त्रिपाठी, नवीन कुमार, शैलेश सुंडी मौजूद थे।

जनजातीय जीवन दर्शन पर आधारित संग्रहालय का उदघाटन

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