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मां भगवती केरा व पाउड़ी मंदिर में कालिका घट आगमन के बाद पूजा-अर्चना के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़
प्रसिद्ध मां भगवती मंदिर केरा व पुरानी बस्ती के मां पाउड़ी मंदिर में लगनेवाली चैत्र मेला के अंतिम दिन कालिका घट आगमन के बाद भक्तों की हठभक्ति आकर्षण के केंद्र में रहा। मां की प्रति भक्ति जताते हुए सैकड़ों भक्त दहकते अंगारों पर दौड़े व कांटों पर लेटकर भक्ति प्रकट किया। नन्हें बच्चों को कांटों पर लेटाते व अंगारों में पैदल दौड़ाते जैसे नजारे भी देखने को मिला।
इस दौरान बारिश होने पर दहकते अंगारे बूझ गए तो कांटों पर नंगे बदन लोटने की होड़ मच गई। इस दौरान केरा भगवती मंदिर में कई राज्यों से लाखों श्रद्धालु पहुंचे हैं। हजारों की तादाद में दुकानें लगी है। इस दौरान केरा मंदिर में पहुंचने वाली कालिका घट दर्शन के लोगों की होड़ मची रही । घट मंदिर तक घटवारी के लाने के दौरान जगह जगह पर श्रद्धालुओं द्वारा पूजा किया गया। केरा मंदिर परिसर में रात को छऊ नाच होने के बाद रात दिन मेला लगा है। इस दौरान मेले में इलेक्ट्रिक झूला, रेल गाड़ी झूला, डिस्को झूला आदि मनोरंजन के साधन लगे हैं।
बारिश होने पर दहकते अंगारे बूझ गए तो कांटों पर नंगे बदन लोटने की मची होड़
दहकते अंगारे बूझ गए तो कांटों पर लेटकर भक्तों ने दिखाई अपनी भक्ति।
चड़क पूजा: भुरकुली गांव में मनी पाट संक्रांति
अंगारे पर नंगे पांव चलकर भक्त और भोक्ताओं ने दिखाई आस्था की शक्ति
सरायकेला| सरायकेला प्रखंड अंतर्गत भूरकुली गांव में परंपरागत तरीके से चड़क पूजा चैत्र पर्व के तहत पाट संक्रांति मनायी गई। क्षेत्र प्रसिद्ध उक्त आध्यात्मिक कार्यक्रम को लेकर गांव में सुबह से ही भक्त और भोक्ताओं की भीड़ उमड़ी। पाट संक्रांति के धार्मिक अनुष्ठान के तहत प्रातः बेला में भोक्ताओं द्वारा मोड़ापाट लाया गया। इसमें व्रती भोक्ता को स्थानीय तालाब में स्नान ध्यान करा कर खाली बदन लोहे की कील की शैय्या पर लिटाकर ग्राम स्थित बाबा विश्वनाथ महादेव मंदिर लाया गया। इस दौरान भक्तों द्वारा स्थानीय भाषा में पाट भोक्ता शिवा बोनी बेल के जयकारे लगाए जाते रहे। इसके बाद भक्त और भोक्ताओं की भक्ति की शक्ति का प्रदर्शन शुरू हुआ। आग की बेदी सुलगाकर भोक्ता व भक्त खाली पांव उस पर चले। 63 वर्षीय भोक्ता आस्तिक सरदार ने अपने पीठ पर लोहे की हुक धंसा कर चार-चार सवार बैलगाड़ियों को खींचा।
अलौकिक होता है प्रदर्शन
प्रचलन की मानें तो हल्की सी चोट भी दर्द देने वाली होती है। यदि लोहे से चोट चपेट लगे तो लोग सेप्टिक होने के भय से तुरंत इलाज के लिए दौड़ते हैं। लेकिन आस्था के इस महात्योहार में अपने शरीर को पीड़ा देने वाले लोग बताते हैं कि इससे उन्हें जरा भी दर्द नहीं होता है। वही स्थानीय जन हिमांशु महतो, पूर्णचंद्र सरदार, बताते हैं कि लोहे की कील से शरीर को छेदने के बाद आज तक किसी भी भक्तों को दर्द नहीं हुआ है।