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साल भर पहले 65 दुकानें जलीं, अब तक नहीं मिली मदद

3 वर्ष पहले
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गुदड़ी बाजार के दुकानदार उस दिन को कभी नहीं भूले हैं जब उनकी आखों के सामने उनकी 65 दुकानें धूं-धूं कर जल गई थी। यह दिन 19 मई 2017 का था। अब इसके पूरे एक वर्ष हो चुका है। इस एक साल के दौरान पीड़ित दुकानदारों को आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला है। प्रशासन ने पीड़ितों की सूची तैयार किया लेकिन मिला कुछ नहीं। अब सरकारी सहायता के इंतजार में दुकानदारों की आस भी खत्म हो गई है। दुकानदार जैसे तैसे कर पुराने जगह पर दुकानें खोल लिया, लेकिन धंधा जोर नहीं पकड़ रहा। पीड़ित दुकानदारों में अधिक्तर कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। कोई बैंक से कर्ज लेकर काम चला रहा है तो किसी के उपर महाजन का भारी भरकम बकाया है। परिवार चलाना भी इनके लिए काफी मुश्किल भरा है। गुदड़ी बाजार का मामला फिलहाल राष्ट्रीय मानाधिकार आयोग द्वारा देखा जा रहा है। मामले के याचिका कर्ता मानवाधिकार संगठन के जिलाध्यक्ष बैरम खान ने बताया की आयोग द्वारा झारखंड के मुख्य सचिव व गृह विभाग झारखंड व गृह विभाग दिल्ली से इस मामले 6 सप्ताह में रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद फिर से 4 सप्ताह का समय आयोग द्वारा दिया गया है। अब अगर कोई जवाब नहीं आता है तो मानवाधिकार आयोग सरकार के स्वतंत्र अंवेषण एजेंसी के साथ लेकर खुद जांच करेगा।

19 मई 2017 की काली रात, गुदड़ी बाजार में जल गई थीं 65 दुकानें, अब कर्ज में डूबकर जीवन गुजारने को बेबस हैं पीड़ित

धू-धू कर जल गई थीं 65 दुकानें

आग लगने के बाद शहर में तनाव

गरमी का मौसम था। 18 मई की मध्यरात्रि रात गुजरकर 19 मई 2017 की भोर हो चुकी थी। अचानक पूरे शहर में खबर फैल गयी कि गुदड़ी बाजार में आग लगी है। व्यापारी, दुकानदार दौड़कर बाजार पहुंचे। देखते ही देखते आग पूरे एरिया में फैल गयी। कपड़ा, सब्जी, इलेक्ट्रिक आदि की 65 दुकानें खाक हो गई। बाजार में तनाव का माहौल बन गया। पुलिस पर पत्थराव तक हुआ।

क्या कहते हैं दुकानदार

दुकानदार यशवंत कुमार अग्रवाल ने बताया की दुकान खाक होने के बाद स्थिति काफी खराब हो गई थी। लगभग तीन लाख रुपए का नुक्सान उस समय हुआ था। फिलहाल सूद में पैसा लेकर गुजारा कर रहे हैं।

यशवंत कुमार अग्रवाल, दुकानदार।

रेडीमेंड कपड़ा दुकानदार मो नासिर ने बताया की एलआईसी पॉलिसी के बदले लेकर दुकान चला रहे हैं। सरकारी मुआवजा के इंतजार में साल बीत गया अब तो उम्मीद नहीं लग रहा की किसी तरह की मदद भी मिलेगी।

मो नासिर, दुकानदार।

कपड़ा दुकानदार शंभुनाथ ने कहा कुछ दिनों तक दुकान को फिर से चलाना मुश्किल हो गया था। लेकिन अब दुकान में सब ठीक ठाक चल रहा है। मुआवजा के इंतजार में रहते तो जीना मुश्किल हो जाता। शंभुनाथ शर्मा, दुकानदार।

दुकानदार मो अख्तर ने बताया की दुकान जलने के वजह से बच्चों की पढ़ाई बर्बाद हो गई। सभी महाजन का है रोजाना कमाओ और पैसे महाजन को दो। कुछ पैसे बचते हैं जिस्से परिवार चल रहा है। मो. अख्तर, दुकानदार।

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