लोको कॉलोनी के पास नेपाली खोली का नेपाली परिवार व चापाकल।
भास्कर न्यूज | चक्रधरपुर
लोको कॉलोनी के पास स्थित रेलवे लाइन के किनारे बसे वार्ड संख्या 12 का नेपाली खोली को लोग मिनी नेपाल भी कहते हैं। दरअसल यहां नेपाली समुदाय के कई परिवार रहते हैं। 70 साल पहले बसे इस नेपाली खोली में पहुंचने को सड़क तक नहीं है। इतना ही नहीं इस बस्ती के 120 परिवारों के लिए सिर्फ एक चापाकल है। फिलहाल यहां से कई नेपाली परिवार रेलवे से रिटायर्ड होने के बाद वापस नेपाल चले गए । 2017 तक इस बस्ती के लोग पानी के लिए एक कुंआ पर ही निर्भर थे। लेकिन अब चापाकल एक है। इस बस्ती तक पहुंचने के लिए लोग खेत केीपगडंडी होकर पहुंचते हैं। नेपाली खोली में अब मात्र चार नेपाली परिवार रहते हैं। जिसमें दीपक ज्ञानजंन, रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग, डीली लिम्बु कैरेज विभाग, गोपाल सिंह इलेक्ट्रिक विभाग, व गोपाल सिंह थापा सी एंण्ड डब्लु विभाग में कार्यरत हैं।इनके अलावे दो व्यक्ति रेलवे के आरपीएफ के एसआई व एएसआई से भी रिर्टायर्ड होकर नेपाल में जाकर बस चुके हैं।
नेपालियों की अलग ही संस्कृति
नेपाली खोली में रहनेवाले नये पीढ़ी के युवा अपने मेहनत से चक्रधरपुर में बने रहने की कोशिश में है। अलग अलग क्षेत्र में काम करने के अलावे वे फास्ट फूड की दुकानें चला रहे हैं। जिसमें वे नेपाली खान पान को बढ़ावा दे रहे हैं। इनकी संस्कृति भी अलग है। जिसको बनाये रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।