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सोलह श्रृंगार कर सुहागिनों ने किया वट सावित्री व्रत, उपवास रख मांगा अखंड सौभाग्य का वरदान
मंगलवार को सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री का व्रत रखकर अखंड सौभाग्यवती का वरदान मांगा। वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष अमावस्या के दिन हुआ। इस दौरान बरगद पेड़ के नीचे सैकड़ों की तादाद में महिलाएं जमा होकर पूजा अर्चना की। इस दौरान महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पति के दीर्घायु के लिये यमराज से याचना की। वहीं वट वृक्ष के नीचे सती सावित्री व्रत कथा को सुनी। पुरानी बस्ती नदी घाट के अलावे ग्रामीण इलाकों में इस दौरान महिलाओं की भारी भीड़ रही। बता दें कि सुहागिनों यह महत्वपूर्ण पर्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार धर्मराज यमराज ने सावित्री के पति सत्यवान को जीवनदान व सावित्री के कठोर तपस्या से खुश होकर अखंड सौभाग्य, सौ पुत्र प्राप्ति व सास ससुर के लिए नेत्र का वर दिया था। सुहागिन स्त्रियां वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ का पूजन करती है।इसे बरदगाई भी कहा जाता है। मंगलवार को शहर व आसपास का तापमान 40 डिग्री के आसपास रही। इस दौरान सावित्री व्रत रखनेवाली महिलाएं उपवास रखने के कारण नंगे पैर पैदल ही पूजा को पहुंची।
चक्रधरपुर। वट सवित्री व्रत के अवसर पर कथा सुनतीं महिलाएं।
बंदगांव। वट वृक्ष की पूजा करतीं मिहलाए।ं
जगह-जगह सुहागिनों ने की पूजा
बंदगांव/मनोहरपुर। प्रखण्ड के विभिन्न गांव के बट वृक्षो में मंगलवार को सुहागिन महिलाएं सावित्री व्रत कर अपनी पति की लंबी उम्र की कामना की। पूजा अर्चना कर महिलाएं सदा सुहागन रहने का वरदान मांगा। सुबह से ही महिलाएं नए वस्त्र धारण कर जगह जगह बट बृक्ष में की पूजा अर्चना की। कराईकेला, बरडीह, पुरानाडीह, आहारबांध, बाउरीसाई, गोपालपुर, रांगरिग, कालीकाबेडा समेत दर्जनों गांव में पूजा अर्चना की गई। मंगलवार को मनोहरपुर व आनंदपुर प्रखंड की सुहागिनों ने अपने पति की दीर्घायु के लिए वट सावित्री की पूजा परम्परागत तरीके से किया। इस मौके पर महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा की, धागे बांधे और पेड़ के नीचे सावित्री व सत्यवान की कथा सुनी। पति की लंबी उम्र की कामना की।