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नेपाल भूकंप के बाद सबसे पहले एवरेस्ट चढ़ाई की कोशिश की थी, 8वीं नाकाम कोशिश में जान गई

3 वर्ष पहले
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पर्वतारोही नोबूकाजो कोरिकी नहीं रहे

जन्म: 9 जून 1982

मृत्यु: 21 मई 2018

2012 में कोरिकी के हाथों की उंगलियां गल गई थीं, फिर भी पहाड़ चढ़ना जारी रखा...

चढ़ाई के दौरान 7,400 मी ऊंचाई पर मृत मिले

एजेंसी | काठमांडू

पर्वतारोही नोबूकाजो कोरिकी नहीं रहे। कोरिकी की पहचान थी- 6 महाद्वीपों के सबसे ऊंचे पर्वत चढ़ने वाले शख्स, 2015 के भीषण नेपाल भूकंप के बाद एवरेस्ट चढ़ने की हिम्मत दिखाने वाले शख्स। और अब कोरिकी ने अलविदा भी ऊंचाई से ही कहा। एवरेस्ट चढ़ने की आठवीं कोशिश में उनकी जान चली गई। 7,400 मीटर की ऊंचाई पर कोरिकी बेसुध मिले। साथी पहुंचे तो पता चला वो नहीं रहे। तमाम ऊंचाईयां छूने वाले कोरिकी को जाते-जाते एक कसक रह गई। वो 8 कोशिशों के बाद भी माउंट एवरेस्ट फतह नहीं कर पाए। 2009 से वो अकेले ही एवरेस्ट तक पहुंचने को कोशिश कर रहे थे। इसी कोशिश में 2012 में कोरिकी के हाथ की 9 उंगलियां भी गल गईं, लेकिन एवरेस्ट पर सफलता नहीं मिली।

नेपाल भूकंप के बाद जब कोरिकी को एवरेस्ट चढ़ने का परमिट मिला था, तो भास्कर ने उनसे बात की थी। उस बातचीत के कुछ प्रमुख अंश एक बार फिर साझा कर रहे हैं...

भूकंप के बाद पहाड़ चढ़ने के डर पर...

\\\"डर का नहीं, हिम्मत और जज्बे का नाम है हिमालय\\\'

\\\"भूकंप ने लोगों को अंदर तक डरा दिया है। इस बार लोग हिचकिचा रहे थे, वो भी जो पहले एवरेस्ट तक पहुंच चुके हैं। मैं तो अब भी कोशिश ही कर रहा हूं क्योंकि कोशिशें ही तो कामयाब होती हैं। भूकंप में 4 देशों के 19 माउंटेनियर्स की जान जाने के बाद दुनिया एवरेस्ट से डरने लगी है। हिमालय मौत और डर का नहीं, जज्बे और साहस का नाम है। और मैं इसे गले लगाने जा रहा हूं।’ शेष | पेज 2

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