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चीनी पैंतरेबाजी की अनदेखी कर देश के लिए खतरा बढ़ा रहे हैं ट्रम्प

3 वर्ष पहले
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पॉल क्रुगमैन

जेडटीई का नाम आपने सुना ही होगा, चीन की बड़ी लेकिन हल्के किस्म के मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी है। पिछले दिनों इस पर अमेरिकी सरकार ने भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। वह राशि इतनी बड़ी है कि चीन में हजारों या लाखों लोगों के जॉब जा सकते हैं। अपनी इस कंपनी को ढहने से बचाने के लिए खुद चीन सरकार आगे आई है। यहां संदेह है कि क्या सुलह-मशविरे के चीन के प्रयासों के आगे झुकते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति देश की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं।

मैं यह नहीं कहता कि यह हास्यास्पद है। हम सभी को ऐसा लगता हैं क्योंकि हम डोनाल्ड ट्रम्प को जानते हैं। ऐसा होना संभव है, क्योंकि इसके कोई सबूत नहीं है। यह बात ऐसे कानून की नहीं है, जिसमें आरोपी दोषी साबित होने तक निर्दोष होता है। अमेरिका के उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों को भी इन बातों की फिक्र है क्योंकि जो हो रहा है वह बहुत गलत है। हो सकता है कि ट्रम्प परिस्थितियों से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं या फिर इसमें उनके कोई निजी हित हों।

ऐसा भी नहीं है कि ट्रम्प के फैसलों से कोई फर्क नहीं पड़ता, गंभीर फर्क पड़ता है। संसद के निचले सदन कांग्रेस में ट्रम्प की पार्टी का बहुत है, नियंत्रण है लेकिन वह भी कुछ नहीं कर पा रही है। इस मुद्‌दे में यही महत्वपूर्ण बात है, यह ऐसी पार्टी की बात है जो हमेशा खुद को राष्ट्रप्रेमी के तौर पर प्रदर्शित करती रही है और अपने विरोधियों से राष्ट्रप्रेम के सवाल करती है। आज पूरी पूर्टी इस तरह के भ्रष्टाचार में भी प्रशंसा की पात्र बनी हुई है, हो सकता है कि वह शत्रुता की भावना रखने वाली विदेशी ताकतों से बदले में कुछ हासिल कर रही हो।

अब तक की कहानी यह है कि पिछले कुछ वर्षों में चीन की इलेक्ट्रॉनिक कंपनी जेडटीई सस्ते व हल्के स्मार्टफोन व अन्य चीजें बनाती रही है, पिछले कुछ महीनों से वह लगातार अमेरिका में परेशानियों का सामना कर रही है। उसके कई प्रोडक्ट, जिसमें अमेरिकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है, उसका नियम है कि उन्हें प्रतिबंधित देशों में निर्यात नहीं किया जा सकता, जैसे कि उत्तर कोरिया और ईरान। लेकिन जेडटीई ने प्रतिबंधों की धज्जियां उड़ाते हुए वहां अपने प्रोडक्ट बेचे। कुछ ही दिन पहले इस कंपनी पर 8,040 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसके बाद बता चला कि इस कंपनी ने गलत काम करने वाले अपने एग्जीक्यूटिव पर कार्रवाई करने की बजाय उन्हें पुरस्कार प्रदान किया। फिर यह हुआ कि अमेरिका के वाणिज्य मंत्रालय ने अगले सात वर्ष के लिए जेडटीई पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसके असर से अमेरिकी कंपनियां उसे सात वर्ष तक अपने कलपुर्जे नहीं बेच सकेंगी। दो सप्ताह पहले ही अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने अपने सभी मिलिट्री सैन्य बेस में जेडटीई फोन की बिक्री एवं वहां तक उनकी पहुंच पर प्रतिबंध लगा दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि चीन इस कंपनी के प्रोडक्ट की आड़ में जासूसी कर सकता है।

इन सभी आदेशों का पालन भलिभांति रूप से होना शुरू हो गया था, तभी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा कर दी कि वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे कि जेडटीई को किसी तरह बचाया जा सके। ऐसा इसलिए क्योंकि जेडटीई को प्रतिबंधित करने से चीन में हजारों या लाखों जॉब चले जाएंगे। यही नहीं, ट्रम्प ने वाणिज्य मंत्रालय को भी कहा कि वह उनके आदेश का क्रियान्वयन करे।

संभव है कि इस बातचीत के पीछे कोई और कारण हो और ट्रम्प अपनी तरफ से चीन को कोई नया प्रस्ताव दे रहे हों क्योंकि अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर की स्थिति है। यहां सवाल उठता है कि ट्रम्प चीन की बात मान क्यों रहे हैं? यह बात सामने आते ही नजरें इंडोनेशिया की तरफ घूम जाती हैं, जहां चीन की एक सरकारी कंपनी ने ऐसे प्रोजेक्ट में भारी निवेश करने की घोषणा है, जिसमें ट्रम्प संस्थान (ट्रम्प परिवार का कारोबार) की भी हिस्सेदारी है। चीन का वह निवेश उसके ‘बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट’ का हिस्सा है। इसके तहत चीन कई देशों में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे करेगा और उन्हीं की बदौलत समूचे यूरेशिया तक अपना भौगोलिक प्रभाव बढ़ाएगा। हालांकि, ट्रम्प के इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान का क्या हुआ यह कोई नहीं जानता। © The New York Times

दैनिक भास्कर से विशेष अनुबंध के तहत

जिस कंपनी पर अमेरिका के वाणिज्य मंत्रालय ने सात साल का प्रतिबंध लगाया, ट्रम्प ने उसी को रद्द करते हुए कहा कि वे उस कंपनी को बचाने के प्रयास करें। हालांकि, पेंटागन ने अपने सभी मिलिट्री बेस में उस कंपनी के फोन एवं उपकरणों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।

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