सप्ताह में 2 से 3 दिन जनशताब्दी एक्सप्रेस का सफर टिकट लेने के बाद यहां के यात्री नहीं कर पा रहे हैं। जनशताब्दी एक्सप्रेस में सफर करने वाले यात्रियों के लिए सुबह 6 बजे की पैसेंजर बेहतर विकल्प है। क्योंकि यह ट्रेन उन्हें 1 घंटे में चांपा पहुंचा देती है। 15 अप्रैल के बाद से अक्सर पैसेंजर ट्रेन 2 घंटे में पहुंच रही है। इससे 7.35 बजे चांपा से रायपुर की ओर जाने वाली जनशताब्दी एक्सप्रेस छूट जाती है। मजबूरी में यात्रियों को चांपा में या बिलासपुर में रायपुर जाने विकल्प ढूंढ़ना पड़ता है।
अनियमित परिचालन की यह स्थिति केवल सुबह की पैसेंजर में ही नहीं सुबह 11.37 बजे गेवरारोड-बिलासपुर पैसेंजर बनकर चलने वाली छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में भी निर्मित होती है। ट्रेन में 30 किलोमीटर दूर चांपा 2 घंटे मंे पहुंचती है। ऐसे में जिन यात्रियों को अन्य रूट की ट्रेन पकड़नी होती है वे परेशानी में फंस जाते हैं। जनशताब्दी एक्सप्रेस में रायपुर जाने वाले लोग अधिक होते हैं। समय पर रायपुर पहुंचकर काम निपटाते हुए उसी दिन यहां वापस आना चाहते हैं।
ट्रेन में सफर के दौरान परेशान यात्री
ऑनलाइन बुकिंग से होता है नुकसान: चांपा में जनशताब्दी ट्रेन छूट जाने से यात्रियों को टिकट की राशि बेजा जाती है। इस ट्रेन का टिकट ऑनलाइन बुक कराना होता है। ट्रेन छूट जाने पर उक्त टिकट किसी अन्य ट्रेन में उपयोग नहीं आता। क्योंकि समय पर कोई ट्रेन ही नहीं होती है। ऐसे में टिकट बुकिंग की राशि बेकार जाती है और परेशानी अलग होती है।
ट्रैक खाली नहीं रहता
एआरएम आदित्य गुप्ता ने बताया कि चांपा में मेंटनेंस के कारण 2 ट्रैक पर अधिक दबाव रहता है। ट्रैक खाली नहीं होने के कारण कई बार यात्री ट्रेनों को चांपा से पहले रोकना पड़ता है। हालांकि यह स्थिति कभी कभी ही होती है। यात्रियों की सुविधा का पूरा ख्याल रेलवे रखता है।
5 हजार लोग करते हैं सफर
कोरबा से प्रतिदिन 5000 लोग ट्रेन में सफर करते हैं। जिसमें से सुबह की पैसेंजर ट्रेन में ही करीब डेढ़ हजार लोग आना जाना करते हैं। ट्रेन के विलंब होने से इन यात्रियों को काफी असुविधा होती है। रेल प्रबंधन का ध्यान इस ओर नहीं होने से यात्री ट्रेन लगातार विलंब से चल रही हैं।
चांपा बाद मिलती
है राहत
जिन ट्रेनों को कोरबा से चांपा के बीच 2 घंटा लगता है वहीं ट्रेन चांपा से बिलासपुर का सफर महज 30 मिनट में पूरा कर लेती हैं। कोरबा से चांपा के बीच 2 घंटा परेशान होने वाले यात्रियों को आगे का सफर राहत देने वाला होता है लेकिन जिन यात्रियों की उस बीच दूसरी ट्रेन चांपा या बिलासपुर में पकड़नी होती है उनकी परेशानी बनी रहती है।
इसलिए हो रहा विलंब
कोरबा से चांपा के बीच 5 स्टेशन हैं। सबसे ज्यादा दबाव उरगा, मड़वारानी व बालपुर में मालगाड़ियों का रहता है। चांपा में पुल मरम्मत का काम रेलवे करा रहा है। जिसके कारण एक ट्रैक बाधित है। जिसके कारण अधिक से अधिक लोड व अनलोड मालगाड़ी निकालने की कोशिश रेलवे की होती है। इसीलिए यात्री ट्रेनों को कोरबा से चांपा के बीच में 5 स्टेशनों के बाद भी आउट में आधा-आधा घंटा रोक दिया जाता है।