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रमजान के स्वागत में साल भर जन्नत सजाता है अल्लाह

3 वर्ष पहले
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रमजान उल मुबारक का पवित्र माह हम पर साया फगन हो चुका है। इस महीने को सबसे पवित्र माह होने के साथ सभी महीनों का सरदार होने का सौभाग्य प्राप्त है। रमजान अरबी का नौवां माह है। रमजान के पूरे माह मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखने के साथ इबादत में गुजारते हैं। इस माह की बड़ी फजीलत है। रोजा सन दो हिजरी से तमाम आकिल और बालिग मुसलमान पर फर्ज यानी आवश्यक किया गया है। रमजान शब्द रमज से बना है। रमज का अर्थ रुकने के हैं। बुराइयों से रूकने और खूब नेकी बटोरने का नाम ही रमजान है। सूरह अल बकरह में अल्लाह ताला फरमाता है कि ऐ इमान वालों तुम पर रोजे फर्ज किए गए जिस तरह तुम से पहले लोगों पर फर्ज किए गए थे। ताकि तुम मुत्तकी और परहेजगार बन जाओ। यानी रोजा रखने का असल मकसद तकवा प्राप्त करना है। संयमित होकर नेक नीयत से ईमानदारी के साथ अल्लाह को दिल में रख कर भलाई का काम करने को तकवा कहते हैं। परहेजगारी इसकी शर्त है।

इबादत का मौसम है माह-ए-रमजान

माहे रमजान कुरान नाजिल होने का महीना है। अल्लाह ताला की रहमतों और बरकतों का महीना है। सब्र का महीना, रिज्क का महीना, एक दूसरे से खैर खाही का महीना, जन्नत में दाखिल होने का महीना, जहन्नुम से छुटकारा पाने का महीना, माहे स्याम सारी दुनिया के मुसलमानों के लिए जिक व्र फिक्र, तस्बीह व तहलील, तिलावत, नवाफिल, सदका व खैरात, गोया हर किस्म की इबादत का एक मौसम-ए-बहार है। जिस से दुनिया का हर मुसलमान अपने अाप मे ईमान और तकवा के अनुसार हिस्सा पाकर दिल को सुकून और आंखों को ठंडक मुहैया करता है। इस माह की रहमतों से महरूम रहने वाला बदनसीब है। उस पर फटकार है जिसने रोजा पाया और इबादत कर अपने गुनाहों की माफी ना कराई। रमजान के स्वागत में सालभर अल्लाह ताला जन्नत को सजाता संवारता है।

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