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रोजेदारों के लिए नेकियां बेहिसाब, खजूर से करें इफ्तार

3 वर्ष पहले
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जिस प्रकार पवित्र माह रमजान उल मुबारक में अल्लाह अपने बन्दों के लिए रहमत और बरकत बरसाता है और हर सवाब के बदले रोजेदारों को सत्तर गुना अधिक सवाब अता करता है। उसी तरह से अल्लाह रोजेदारों को इफ्तार कराने और करने वालों को भी बेहिसाब नेकी और सवाब से नवाजेगा। अल्लाह ने रोजेदारों को हलाल और पाक माल से रोजा इफ्तार करने का हुक्म दिया है, क्योंकि रोजेदारों का सवाब अनंत है। अल्लाह ने कहा है का रोजा मेरे लिए है और मैं ही इसका बदला अपने बंदे को दूंगा। अगर कोई इंसान किसी रोजेदार को इफ्तार कराता है तो उसे रोजा रखने के बराबर सवाब मिलेगा और रोजेदार के शवाब में किसी तरह की कमी नहीं की जाएगी। रोजा इफ्तार करने वाला रोजा इफ्तार कराने वाले को दुआ देता है कि रोजेदारों ने तुम्हारे पास इफ्तार किया, नेक लोगों ने तुम्हारा खाना खाया। फरिश्ते तुम्हारे लिए रहमत की दुआ करें। मोहम्मद स. मगरिब की नमाज से पहले ताजा खजूर से रोजा इफ्तार किया करते थे। अगर ताजा खजूर ना मिले तो सूखे खजूर से और अगर वो भी ना मिले तो कुछ घूंट पानी पी कर इफ्तार करते थे। इस लिए खजूर से इफ्तार करना सुन्नत है। अगर खजूर ना माले तो पानी से इफ्तार करें क्योंकि पानी पाकीजा है।

सूरज डूबने के फौरन बाद करें इफ्तार

सूरज डूबने के फौरन बाद यानी मगरिब की अजान सुनते ही बिना किसी विलंब के इफ्तार कर लेना भी सुन्नत मे शामिल है। लोग उस वक्त तक भलाई ने रहेंगे। जब तक रोजा खोलने (इफ्तार करने) मे जल्दी करेंगे। जल्दी का मतलब यह नहीं कि सूरज डूबने से पहले ही इफ्तार किया जाए। बल्कि सूरज डूबने के फौरन बाद बिना देरी किए रोजा इफ्तार करना चाहिए। इफ्तार से पहले का समय भी रोजेदारों के लिए खास होता है। लोगों को चाहिए कि यह समय इधर-उधर बर्बाद ना कर के लम्बी दुआएं की जाए। रोजेदार इफ्तार से पहले आसपास के चौक चौराहों पर बैठकर गपबाजी करते हैं और अपना बहुमूल्य समय फालतू बातों में बर्बाद कर देते हैं। अगर इस समय को रोजेदार दुआओं में गुजारें तो कितना बेहतर होगा। इस वक्त की दुआ अल्लाह बहुत जल्द कबूल करता है। अपने फरिश्तों से भी कहता है कि मेरे बंदे की दुआ पर आमीन कहो।

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