पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • आचार्यश्री ने नैतिकता की शिक्षा पर दिया जोर

आचार्यश्री ने नैतिकता की शिक्षा पर दिया जोर

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
आचार्य विद्यासागर जी महाराज के पचासवें स्वर्णिम संयम महोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में बुधवार को कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण किया गया। कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण उच्च शिक्षा एवं जिले के प्रभारी मंत्री जयभान सिंह पवैया ने बस स्टैंड पर किया। इस मौके पर मुनि प्रशांतसागर, निर्वेगसार महाराज भी मौजूद थे।

कार्यक्रम में अपने संस्मरण सुनाते हुए श्री पवैया ने कहा कि चातुर्मास के दौरान आचार्य श्री से चर्चा हुई थी। इसमें उन्होंने चरित्र एवं नैतिकता की शिक्षा पर जोर दिया था। उनकी सलाह का अनुसरण करते हुए पाठ्यक्रम में 20 प्रतिशत रिवीजन कराकर नैतिक शिक्षा को शामिल किया। संत हमारे चलते-फिरते तीर्थ है। मनु सतरूपा ने हजारों साल तपस्या की तब भगवान प्रकट हुए। इस युग में में देखता हूं कि जो संत 24 घंटे में एक बार खाते-पीते हों वह दिगंबर है। कार्यक्रम में मुनिश्री निर्वेग सागर जी ने कहा कि बुराई छोड़कर अच्छाई को अपनाना चाहिए। हीरे के समान हर व्यक्ति अपने जीवन को बनाना चाहता है। तो संयम की राह चलो संयम से जीवन तत्व सुख की खोज के लिए पांचों इंद्रियों को वश में रख 22 वर्ष की उम्र में त्याग कर दिगंबर भेष धारण किया।

कठोर चर्या है जो कम उम्र में अंगीकार किया। दिगंबर साधू भीषण गर्मी में एक बार ही पानी लेते हैं। जीवन में 51 वर्ष पूरे किए। सत्य अहिंसा का प्रतीक कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण होने जा रहा है जो हमेशा संयम की प्रेरणा देता रहेगा। अपना जीवन नष्ट हो रहा हो, हमारा परिवार नष्ट हो रहा हो तो ऐसी बुराइयों से संयम बरतें। कीर्ति स्तंभ संयम का प्रभाव देता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद थे।

शुभारंभ

आचार्य श्री के पचासवें स्वर्णिम संयम महोत्सव वर्ष पर कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण करते हुए प्रभारी मंत्री पवैया ने कहा

कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण करते प्रभारी मंत्री जयभान सिंह पवैया।

खबरें और भी हैं...