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फूड में फर्जीफिकेशन का मतलब है इंटरेस्टिंग ट्विस्ट देना

3 वर्ष पहले
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फूड की दुनिया इतनी दिलचस्प है कि आप उसके बारे में लगातार कहते, सुनते रह सकते हैं। हर जायके की अलग कहानी। हर प्रेजेंटेशन की अलग दास्तान। लेकिन इन कहानियों में कुछ फर्जीफिकेशन होने लगे तो जो सामने आएगा वो क्या हाेगा ? फजीफिकेशन के मास्टर यानी जोरावर कालरा खुद इस बारे में बात करने चंडीगढ़ पहुंचे शुक्रवार को। सेक्टर 26 में उन्होंने हमसे बात की फूड और फिलॉसफी पर। वे बोले- फर्जीफिकेशन का मतलब फूड में है उसे ट्विस्ट देकर प्रेजेंट करना। यानी आप साग, मक्की की रोटी, अचार, गुड़ और मक्खन को सिर्फ एक बार में उठाकर खा सकें। सारे जायके एक के बाद आकर मुंह में घुलने लगें और आप के मुंह से निकले वाह। दरअसल मॉलिक्यूलर गेस्ट्रॉनोमी और नए तरह की कुकिंग को इंडियन रेसिपी के साथ मिलाकर वे नए मेन्यू सेट करते रहे हैं। चंडीगढ़ सेक्टर 26 में फर्जी कैफे की ओपनिंग से पहले उन्होंने इस पर खुलकर बात की। ये नाम कैसे आया जहन में? वे बोले-मेरे सामने आए कम से कम बीस नामों में से एक ये था जो जंच गया और आेके हो गया। अब हम देश के कई शहरोें में इसे इंट्रोड्यूस कर चुके हैं। जोरावर मैसिव रेस्टोरेंट्स नाम की कंपनी के एमडी हैं और अपना काम विदेशों तक ले जाकर नाम कमा चुके हैं। वे टीवी पर फूड रिएलिटी शो मास्टर शेफ में जज रह चुके हैं और अपनी पावरफुल प्रेजेंस के लिए याद किए जाते हैं। आगे क्या योजना हैं? वे बोले-रिएलिटी शो में होने का अपना ही मजा है और हो सकता है कि मैं आने वाले समय में भी इन्हें करता रहूं, लेकिन उसमें समय और सब्र देानों की जरूरत होती है। कम से कम तीन महीने एक शो के लिए चाहिए होते हैं। तो देखते हैं क्या सीन बनता है। जोरावर, जिग्स कालरा के बेटे हैं और फूड का पैशन उन्हें विरासत में मिला है। उनके लिए फूड को आगे लेकर जाने का मतलब क्या है? वे क्या मकसद लेकर चल रहे हैं? उन्होंने बताया- मैं भारतीय खानों को अलग अंदाज में सारी दुनिया के सामने लेकर जाना चाहता हूं। हमारे दाल चावल, रोटी सब्जी, गुझिया , कुल्चा सबकुछ अलग अंदाज में ग्लोबली पहुंचाना चाहता हूं।

Farziaappa

जोरावर कालरा शुक्रवार को चंडीगढ़ में थे। उन्होंने बात की फूड में शामिल की गई नई फिलॉसफी और उसकी ग्लोबल पहचान पर ...
चंडीगढ़ तो मेरी ससुराल है
जोरावर महज अपने काम से नहीं, रिश्तों से भी चंडीगढ़ से जुड़े हैं। वे बताते हैं-मेरी तो शादी ही चंडीगढ़ में हुई है। यहां आता रहताा हूं। यहां आए बिना मेरा काम चलेगा भी कैसे। ग्यारह साल हो गए चंडीगढ़ से रिश्ता बने। ये शहर अब मेरे लिए अपना ही है। यहां के लिए मेन्यू सेट करते हुए उन्होंने किन बातों का ध्यान रखा? बोले-हमने यहां देश के अन्य शहरों के मुकाबले मसालों की डोज दस फीसदी बढ़ाई है। हम जानते हैं कि यहां के लोगों का जायका बाकी जगहों से अलग है। तो उनकी पसंद को ध्यान में रखते हुए ये किया गया है। हम जगह के हिसाब से ही चीजें तैयार करते हैं। उदाहरण के लिए जैसे हमें दुबई के रेस्त्रां में लिकर सर्व करना अलाउड नहीं है तो हम वहां बहुत किस्मों की मॉकटेल्स सर्व करते हैं। इसमें हमने इतना इनोवेट किया है कि लोग वहां मॉकटेल्स के लिए ही आने लगे। इसी तरह फूड को भी हम वहां आने वाले मेहमानों के हिसाब से तैयार करते हैं। यही फिलॉसफी हम दूसरी जगहों पर भी इस्तेमाल कर रहे हैं। जहां जाएंगे वहीं का स्वाद अपने खाने में लेकर पेश करेंगे।

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