इस हमले से पूरी पंजाबी म्युजिक इंडस्ट्री अपसेट है
शुक्रवार देर रात किसी ने म्युजिक डायरेक्टर-सिंगर व एक्टर परमीश वर्मा को मोहाली सेक्टर 91 में, गोली मारी, जो टांग में लगी। इसके बाद मोहाली के एक अस्पताल में उनकी सर्जरी हुई और अब वे खतरे से बाहर हैं। हैरानी की बात ये है कि गोली मारने के कुछ घंटे बाद पंजाब के ए ग्रेड गैंगस्टर ने सोशल मीडिया पर इस हमले की जिम्मेदारी ली और साथ ही यह भी कह दिया कि किस्मत अच्छी होने के कारण इस बार तो वह बच गया, अगली बार नहीं बचेगा। ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि किसी कलाकार पर इस तरह का हमला हुआ हो। साल 1988 में अमर सिंह चमकीला और उनकी प|ी अमरजोत, 1988 में ही कवि पाश और साल 1995 में सिंगर दिलशाद अख्तर पर इस तरह के हमले हुए जिसमें उनकी जान चली गई। खैर, परमीश वर्मा पर हुए इस हमले से उनका पूरा परिवार तो दुखी है ही, पंजाबी म्युजिक और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग भी इस घटना की निंदा कर रहे हैं। इस बारे में हमने कुछ लोगों से बात की।
Attack on Singer
शुक्रवार देर रात म्युजिक डायरेक्टर-सिंगर व एक्टर परमीश वर्मा को गोली मारी गई जो उनकी टांग में लगी। वे अब अस्पताल में हैं और खतरे से बाहर हैं। म्युजिक और लिटरेचर से जुडे़ लोगों पर पहले भी ऐसे हमले हुए हैं ...एक रिपोर्ट
टौर नाल छड़ा ...
ये कैसी खुंदक है
 कलाकार पर हमला, गलत बात है। परमीश ने कोई लच्चर गाना नहीं गाया कि कोई उनसे खुंदक निकाले। हो सकता है कि ये कोई निजी रंजिश हो। पर जो भी हो, कोई मसला हो तो बैठकर बात की जा सकती है। समझाया जा सकता है। पर सीधा गोली मारना गलत है।  गुरबिंदर मान, लिरिसिस्ट एंड सिंगर
कलाकार पर हमला, पंजाब को बदनाम करना
 करिअर की शुरुआत में परमीश ने मेरे गीत परफ्यूम का वीडियो डायरेक्ट किया था। वह नेक इंसान हैं। कलाकारों पर हमला पंजाब के अक्स को खराब करता है। पहले पंजाब नशे के लिए बदनाम किया और अब कलाकार पर निशाना।  निशावन भुल्लर, सिंगर
इंडस्ट्री के लिए दुखद
 मैंने फिल्म रॉकी मेंटल में उनके साथ काम किया। इस घटना के बारे में सुनने के बाद से अपसेट हूं। इंडस्ट्री एक परिवार की तरह है। परिवार के सदस्य पर हमला हुआ ये पूरी इंडस्ट्री के लिए दुख की बात है। मैं बस इतना कहूंगा कि गोली मारना बहुत गलत है।  धीरज कुमार, एक्टर
इन तीनों का इसलिए हुआ था मर्डर
पाश क्योंकि पंजाब में वामपंथ की सिरमौर आवाज बन चुके थे। इसलिए 1988 में खालिस्तानी आतंकवादियों ने उनकी हत्या कर दी थी।
बेखौफ होकर गीत गाने वाले अमर सिंह चमकीला अक्सर सामाजिक कुरीतियों, नशे, मादक पदार्थ जैसे मामलों पर बात करते थे। यही वजह थी कि उनके चाहने वाले ज्यादा थे। जब चमकीला अपने करिअर के शीर्ष पर थे, तो उनके गीत ही उनकी जान के दुश्मन बन गए। 1988 में चमकीला और उनकी प|ी पर मोटरसाइकल गिरोह ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इसमें चमकीला और अमरजोत के साथ उनके दो साथी भी मारे गए। चमकीला की हत्या का दोषी खालिस्तानी आतंकवादियों को माना गया। वहीं कुछ लोगों का कहना था कि अमर पंजाब के बेहतरीन गायक थे। इस वजह से दूसरे गायकों ने साजिश करके उनको मौत के घाट उतार दिया।
साल 1995 में एक शादी में गा रहे गायक दिलशाद अख्तर को नशे में धुत्त डीएसपी स्वर्ण सिंह हुंदल ने अपनी पसंद का एक गीत गाने को कहा। जब उन्होंने नहीं गाया तो डीएसपी ने उन्हें शूट कर दिया।