हम अब मेडिटेशन को डीमिस्टीफाई कर रहे हैं
सिटी रिपोर्टर | चंडीगढ़
आप अपने जीवन में पूरी तरह खोए होते हैं कि अचानक एक दिन कुछ घटता है और जीवन 360 डिग्री घूम जाता है। जो काम आपके हाथ में था वो वहीं छोड़ आप बढ़ जाते हैं उस राह पर जिसके बारे में पहले कभी सोचा नहीं था। ऐसा बहुत लोगों के साथ होता है, लेकिन जोशुआ पॉलक की कहानी न केवल दिलचस्प है बल्कि अलग भी है। जोशुआ अमेरिकन हैं। और वेस्टर्न क्लासिकल वोकलिस्ट के तौर पर जाने जाते हैं। उन्होंने भारतीय संगीतकार एआर रहमान के साथ भी काम किया है। वे 2002 में भारत आए और यहां मेडिटेशन को जाना और समझा। इसके बाद से वे भारत में ही रह रहे हैं। वे हार्टफुलनेस के ट्रेनर व प्रैक्टिशनर हैं। पिछले दिनों उन्होंने अपने गुरु कमलेश डी पटेल के साथ हुई स्प्रिचुअल बातचीत और मेडिटेशन के प्रोसेस से जुड़ी जानकारी पर एक किताब लिखी-द हार्टफुलनेस वे लिखी। इसी के बारे में बात करने के लिए वे चंडीगढ़ पहुंचे थे। इस दौरान हमने उनसे बात की।
क्या है हार्टफुलनेस? वे बताते हैं- जब हम ऐसी स्थिति में पहुंचते हैं कि दिल, दिमाग और शरीर सबकुछ शांत और ठहरा हुआ हो तो उस प्रैक्टिस को हम हार्टफुलनेस कह सकते हैं। यह अपने आप आती है या प्रैक्टिस से, इस बारे में सबके अनुभव अलग होते हैं। पॉलक दरअसल मेडिटेशन, ध्यान और एकाग्रता से जुड़े विषयों पर कमलेश डी पटेल से लंबी बातें करते रहे हैं। उसके महत्वपूर्ण अंश इस किताब में हैं। किताब में कमलेश डी पटेल यानी दाजी एक जगह कहते हैं कि सोर्स यानी ईश्वर के साथ एकाकार होने से जो परम शांति मिलती है उसका कोई जोड़ नहीं। जैसे एक बूंद जब सागर में जाकर मिलती है तो उसका अपना कोई वजूद नहीं रहता, वह सागर हो जाती है। ये अपनी तरह का अलग ही अनुभव है।
आखिर मेडिटेशन है क्या ? और आम आदमी को इसकी जरूरत क्यों पड़ती है? वह अपने काम में ही इतना उलझा होता है कि इस तरह की चीजों को साथ लेकर चलना उसे उलझन दे सकता है? इस बारे में पॉलक ने कहा- जब हम मेडिटेट करते हैं, कुछ समय के लिए सबकुछ भूलकर शांत हो जाते हैं। जैसे ही वह समय गुजरता है तो हम बेचैन होने लगते हैं, अब इस बेचैनी को दूर करने और उस आनंद को फिर से पाने की प्रक्रिया ही मेडिटेशन है। इसकी जरूरत इंसान को इसलिए पड़ती है क्योंकि वह आनंद और शांति को हमेशा के लिए पाना चाहता है। क्या ये कहा जा सकता है कि अध्यात्म, मेडिटेशन और सामान्य जीवन एकसाथ चल सकता है? क्या इसके लिए सांसारिक त्याग और मोह आदि को छोड़ना जरूरी है? पॉलक ने कहा- हम यही तो अपनी किताब के जरिए बता रहे हैं कि मेडिटेशन को रहस्य की तरह न देखें। इसमें कुछ भी ऐसा नहीं है जो समझ न आ सके। जिसके लिए किसी अलग तरह की भाषा और प्रोसेस की जरूरत हो। हर आम आदमी इसे कर सकता है।
यह किताब अंग्रेजी में है। क्या इसे अन्य भाषाओं में भी लाया जाएगा? उन्होंने बताया- अप्रैल में ही यह किताब हिंदी में उपलब्ध होगी और इसके बाद भारत की अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी इसे लाया जाएगा। क्या वे किसी और किताब पर भी काम कर रहे हैं ? इसके जवाब में पॉलक ने कहा- जब हम कुछ योजना बनाते हैं तो, ईश्वर अपनी योजना सामने लाकर हमें हैरान कर देता है। इसलिए मैं कुछ भी पहले से सोचकर नहीं चल रहा।
जोशुआ पॉलक की लिखी किताब द हार्टफुलनेस वे इन दिनों चर्चा में है। वे इस पर बात करने पहुंचे चंडीगढ़ ...
मन का एकाग्र होना ही मेडिटेशन है
कोई भी चीज जिससे मन एकाग्र हो और शांत हो तो वह मेडिटेशन है। वह संगीत या कुछ और भी हो सकता है। आप एक सुंदर फूल को देखते हुए भी ऐसा महसूस कर सकते हैं। लेकिन सवाल उठता है कि इस अनुभव के बाद आप क्या महसूस करते हैं, आप उस कुछ पलों की शांति के बाद खुद को फिर से बेचैन महसूस करते हैं। हम इंसान परमानेंट की तरफ देखते हैं। जो भी अच्छा है वह हमेशा रहने वाली भावना के साथ ।