पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • इंटरनेशनल लेवल पर पहुंचीं फिल्में मेहसमपुर और साड्‌डे आले

इंटरनेशनल लेवल पर पहुंचीं फिल्में मेहसमपुर और साड्‌डे आले

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
आरती एम अग्निहोत्री | चंडीगढ़

आज के समय में ऑल्टरनेटिव सिनेमा को सर्वाइव करना हो तो उसे अपने लिए अलग जगह क्रिएट करनी पड़ती है जिसमें उनके सब्जेक्ट अहम भूमिका निभाते हैं। अच्छी बात ये है कि पंजाब में बन रहे कमर्शियल सिनेमा, एनएफडीसी से फंडेंड पंजाबी सिनेमा इंडिपेंडेंट सिनेमा की पहुंच ग्लोबल लेवल तक हो गई है। ये लो बजट मूवीज सिर्फ और सिर्फ अपने कंटेंट की वजह से विश्वभर में अपनी जगहें बना रही हैं। पिछले चार साल में इंडिपेंडेंट फिल्म मेकर्स इतना अवेयर हो गए हैं कि वे अब अपनी फिल्मों के सब्जेक्ट का चयन भी कई पहलुओं को ध्यान में रखकर करते हैं। इस साल की बात करें तो दो पंजाबी फिल्में कान तक पहुंची हैं। इनमें सिटी बेस्ड कबीर सिंह चौधरी की मेहसमपुर और डायरेक्टर जतिंदर मोहर की साड्डे आले शामिल हैं। हालांकि मेहसमपुर को इंडिपेंडेंट फिल्म मेकर्स ने बनाया है। फिल्म मेकिंग के बदलाव पर हमने शहर के कुछ फिल्म मेकर्स से बात की। मेहसमपुर की स्क्रीनिंग पोलैंड में डॉक्स अगेंस्ट ग्रेविटी में हुई है। अगले महीने इसकी स्क्रीनिंग सिडनी और लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल में होगी। फिल्म के बारे में कबीर ने बताया- कई साल पहले वे और उनके दोस्त अक्षय सिंह उग्रवादियों द्वारा अमर सिंह चमकीला और उनकी प|ी अमरजोत कौर पर एक स्क्रिप्ट लिख रहे थे और इसकी रिसर्च के लिए वे पंजाब गए। वहां चमकीला के साथ परफॉर्म कर चुके कई म्यूजिशियंस से मिले। हमें लगा कि इस फिल्म पर रिसर्च कर रहे सिर्फ हम हैं। पर जब हम लोगों से मिले तो पता चला कि उन्हें पहले भी कई फिल्म मेकर मिल चुके हैं। ये सुनकर हमारा माॅरल काफी नीचे हुआ। लेकिन तभी हमारे दिमाग में आया कि मेहसमपुर पर काम किया जाए। बस यही कहानी है इस फिल्म की। जो अब दुनिया तक पहुंची है।

Punjabi Cinema

पंजाब में बन रहे कमर्शियल सिनेमा, एनएफडीसी से फंडेंड पंजाबी सिनेमा इंडिपेंडेंट सिनेमा की पहुंच ग्लोबल लेवल तक हो गई है। पंजाबी फिल्म मेकिंग के नए बदलाव पर फिल्म मेकर्स से बात की।

जाने इन फिल्मों के बारे में...

पिछले चार साल में बढ़ी अवेयरनेस

फिल्म मेकर नवतेज संधू कहते हैं- कई बार अलग सब्जेक्ट्स पर बनी फिल्में कमर्शियली वायरल नहीं होती। पर अब फिल्ममेकर्स को समझ आने लगा है कि फिल्म फेस्टिवल्स का महत्व क्या है। अब वह अपने सब्जेक्ट्स को बड़े ध्यान में चुनते हैं। अच्छी फिल्मों को इंटरनेशनल मार्केट में जगह मिलती है। मेरी ज्यादातर फिल्में साहित्य पर आधारित हैं। अभी मैं एक और फिल्म बना रहा हूं जो वरयाम सिंह संधू की कहानी पर आधारित होगी।

पंजाबी सिनेमा में हो रहा अच्छा काम

फिल्म मेहसमपुर

कबीर ने बताया- यह फीचर फिल्म है। इसमें चंडीगढ़ बेस्ड जगजीत संधू के ढोलक प्लेयर लाल चंद को लिया है जिनकी बाजू में अमर चमकीला के साथ परफॉर्म करते वक्त गोली लगी थी। इनके अलावा उनके साथ गाने वाले सुरिंदर सोनिया और मैनेजर केसर सिंह टिक्कू को लिया है। बोले- फेस्टिवल्स के बाद हम इस फिल्म को कमर्शियली भी रन करेंगे।

नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म नाब्बर और चम्म बनाने वाले राजीव कुमार के मुताबिक पंजाब में इस वक्त तीन तरह का सिनेमा है। एक वो जो मेनस्ट्रीम सिनेमा है। इनके डायरेक्टर्स को कॉमेडी फिल्में बनाकर सफलता भी मिल गई और पैसा भी। हालांकि उनके पास वर्ल्ड सिनेमा का एक्सपोजर ज्यादा नहीं, बावजूद इसके वो अब वो कुछ नया एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं। दूसरा है गुरविंदर सिंह द्वारा बनाई गईं अन्ने घोड़े दा दान और चौथी कूट जैसी फिल्में जिन्हें एनएफडीसी ने फंड किया। तीसरी कैटेगरी अब पंजाबी शॉर्ट फिल्में हैं, जो लिट्रेचर पर आधारित हैं।

फिल्म साड्‌डे आले

किस्सा पंजाब, सिकंदर और मिट्टी जैसी फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर जतिंदर मोहर की फिल्म साड्‌डे आले के ट्रेलर की स्क्रिनिंग 16 मई काे कान में स्पोर्ट कैटेगरी में हुई है। यह फिल्म कबड्डी पर आधारित है। इसमें दीप सिद्धू, सुखदीप सुख, अमृत औलख और गुगु गिल ने एक्ट किया है। फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान दीप सिद्धू और जतिंदर मोहर मौजूद रहे।

ये पहुंचीं ग्लोबल लेवल पर

नवतेज संधू की शाॅर्ट फिल्म नूरां, ऐसी पहली पंजाबी फिल्म थी जो 2014 में कान फेस्टिवल में पहुंचीं। इसके बाद 2015 में इनकी फिल्म कंबदी डिओढ़ी, 2017 में ग्वाची पग कान पहुंची। इसके अलावा 2015 में गुरविंदर सिंह की पंजाबी फिल्म चौथी कूट, राजीव कुमार की शॉर्ट पंजाबी फिल्म चम्म, सतिंदर सरताज की फिल्म ब्लैक प्रिंस भी पिछले साल कान पहुंची। इनके अलावा गुरविंदर सिंह की फिल्म अन्ने घोड़े दा दान, राजीव कुमार की नाब्बर अवॉर्ड विनिंग फिल्म रही हैं।

Today’s Celebration

आज होगा इंटरनेशनल म्यूजियम डे सेलिब्रेट

दो दिन तक चलने वाला यह सेलिब्रेशन सेक्टर-10 के गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी में होगा। सिर्फ 18 मई को म्यूजियम में एंट्री फ्री रखी गई है।

सिटी रिपोर्टर | चंडीगढ़

म्यूजियम विरासत को संभालकर रखने की ऐसी जगह है, जिसके जरिए लोगों को अपने शहर, संस्कृति और इतिहास के बारे में भी पता चलता है। म्यूजियम से ज्यादा लोग जुड़े इस मकसद से टूरिज्म डिपार्टमेंट और चंडीगढ़ आर्किटेक्चर म्यूजियम इंटरनेशनल म्यूजियम डे 18 मई को सेलिब्रेट कर रहा है, जो दो दिन तक होगा। चंडीगढ़ आर्किटेक्चर म्यूजियम और ली कार्बुजिए सेंटर की डायरेक्टर दीपिका गांधी बताती हैं- पहले दिन गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी के ऑडिटोरियम में एक घंटे की वर्कशॉप सुबह 10 बजे से शुरू होगी। ये सिर्फ सरकारी स्कूल की टीचर्स के लिए है। इसे मैं कडंक्ट करूंगी। इसके बाद इनके लिए म्यूजियम का एक टूर होगा। सरकारी स्कूल की टीचर ही क्यों? दीपिका बोलीं- प्राइवेट स्कूल की तुलना में सरकारी स्कूल के बच्चे इतने अवेयर नहीं हैं। इसलिए सोचा क्यूं न सबसे पहले टीचर्स को अवेयर करें ताकि उनसे बच्चें अवेयर हो सकें। सिर्फ शुक्रवार को म्यूजियम में एंट्री फ्री रखी गई है।

बात होगी, म्यूजियम को प्रमोट करने की

सेलिब्रेशन के दूसरे दिन 19 मई को सेक्टर-19 ली कार्बुजिए सेंटर में डिस्कशन होगी। इसकी थीम म्यूजियम इन ए चेंजिंग वर्ल्ड, न्यू चैलेंज, न्यू इंसपिरेशंस रहेगी। एक्सपर्ट्स के पैनल में आर्ट हिस्टोरियन डॉ. बीएन गोस्वामी, सीएचसीसी के चेयरमैन एसडी शर्मा, चीफ आर्किटेक्ट कपिल सेतिया, मोटिवेशनल स्पीकर एंड ऑथर विवेक अत्रे आदि शामिल होंगे।

फोटोग्राफी एग्जिबीशन

वर्कशॉप के अलावा म्यूजियम के एग्जिबीशन हॉल में फोटोग्राफी एग्जिबीशन लगेगी। यह एग्जिबीशन दो दिन तक चलेगी। दरअसल, म्यूजियम की ओर से कुछ समय पहले फोटोग्राफी कंपीटिशन हुआ था। जिसकी थीम मी एन माई म्यूजियम रही। उसमें से 4 बेस्ट फोटो को 6000, 4000, 2500 और 1000 रुपए का ईनाम मिलेगा।

खबरें और भी हैं...