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जीवन जीने की कला सिखाएगी किताब ‘उद्गार’

3 वर्ष पहले
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काव्य संग्रह- ‘उद्गार’ जीवन से मृत्यु तक, पत्र से प्रकृति तक, दृश्य से अदृश्य और काम से अध्यात्म तक की रचनाएं शामिल हैं। राइटर के मुताबिक जब एक सजग पाठक इन कविताओं को पढ़ेंगे तो राइटर से रूबरू भी होंगे और उन्हें एक सुकून भी मिलेगा। वो इसलिए क्योंकि इन कविताओं में जीवन की प्रत्यक्ष आैर अप्रत्यक्ष अनुभूतियां सामाजिक पक्षों को छूती हैं और आधुनिक समाज की समस्याओं की ओर इशारा करती हुईं उनके समाधान भी सुझाती हैं। इस किताब को गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट पंचकूला की पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. इंद्रा रानी राव ने लिखा है। डॉ. इंद्रा रानी राव प्रख्यात शोधक और समीक्षक, समर्पित प्राध्यापक होने के साथ एक संवेदनशील पोएट भी हैं।

उन्होंने इस किताब को उन लोगों को समर्पित किया है जिन्होंने उन्हें जीवन में शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में प्रेरित किया है। उनकी कविताएं एक ओर प्रेम बिखेरती हैं तो दूसरी ओर व्यक्तित्व के विकास और जीवन जीने की कला सिखाती हैं। इस काव्य संग्रह में कुल 52 कविताएं हैं जिनमें सांध्य की मधुर बेला, मूल्यों का विघटन, बुढ़ापा, संस्कृति, भारतीय नारी, हिंसा, गुलाब, विदाई आदि शामिल हैं। इन्हें कई अवॉर्ड से सम्मानित भी किया जा चुका है।

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