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शहर में दस से ज्यादा म्यूजियम हैं लेकिन लोगांे काे पता ही नहीं

3 वर्ष पहले
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म्यूजियम ऐसी जगह है जो हैरिटेज को संजोकर रखती है। क्योंकि यह न केवल शहर और देश की पहचान है बल्कि गौरव भी है। शहर में ऐसे कई म्यूजियम हैं जो इस बात का उदाहरण हैं। लेकिन बात सिर्फ इसे संजोकर रखने तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए इन्हें ज्यादा से ज्यादा प्रमोट करना चाहिए, ताकि लोग अपने हैरिटेज के बारे में जागरूक हो सकें और अपनी आने वाली पीढ़ी को भी इसके बारे में बता सकें।

चंडीगढ़ की बात करें तो बहुत कम लोगों को पता है कि यहां गांधार शैली के स्कल्प्चर, डॉल्स, फैमस आर्टिस्ट्स की पेंटिग्स काे लेकर कई म्यूजियम हैं। शुक्रवार को इंटरनेशनल म्यूजियम डे के मौके पर हमने लोगों से बात की और जाना कि वह हैरिटेज को लेकर कितने अवेयर हैं और चंडीगढ़ में कितने म्यूजियम में आप गए हो। इनमें से कुछ ऐसे भी हैं, जो म्यूजियम देखने के लिए दूसरे शहरों से आए और कुछ ऐसे भी हैं जो शहर से हैं।

जानिए शहर के म्यूजियम्स के बारे में

चंडीगढ़ आर्किटेक्चर म्यूजियम

जगह- सेक्टर-10 | कब बना- 1997 | कलेक्शन - यहां ड्राइंग, मैप, मॉडल्स, लैटर और फोटो की कलेक्शन है। इनमें चंडीगढ़ की प्लानिंग है। | विजिटर्स- एक दिन में 50 से 60 विजिटर आ जाते हैं। एक महीने में 1000 से 1500 तक | समय- सुबह 10 से शाम 04:30 बजे तक | एंट्री - टिकट से

गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी

जगह- सेक्टर-10

कब बना- 1968

कलेक्शन- यहां गांधार शैली के स्कल्प्चर, राजपूत मिनिएचर आर्ट, कंटेम्परेरी पेंटिंग्स की कलेक्शन है।

विजिटर्स- एक दिन में 150 से 300 विजिटर्स, महीने में 4000- 7000। यह अप्रैल महीने का डाटा है।

समय- सुबह 10 से शाम 04:30 बजे तक

एंट्री - टिकट से

म्यूजियम ऑफ फाइन ऑटर्स

जगह- सेक्टर-14

कब बना-1968

कलेक्शन - यहां देश भर के आर्टिस्ट्स की कलेक्शन शामिल है। इनमें पेंटिंग्स, स्कल्प्चर, म्यूरल आर्ट हैं।

विजिटर्स- एक दिन में आने वाले विजिटर 0- 20 हैं। महीने में 300 से 400। यह अप्रैल महीने का डाटा है।

समय- सुबह 9 से शाम 04:30 बजे तक

एंट्री - फ्री

इंटरनेशनल डॉल म्यूजियम

जगह- सेक्टर-23

कब बना- 1985

कलेक्शन- यहां 35 देशों की 485 डॉल्स हैं। यह सब डॉल्स गिफ्ट की गई है या फिर डोनेट।

विजिटर्स- एक दिन में 100 से 200 तक। एक महीने में 3000 से 6500।

एंट्री - टिकट से

समय- सुबह 10 से शाम 04:30 बजे तक

इनके अलावा ये म्यूजियम भी हैं

पियरे जेनरे म्यूजियम, सेक्टर- 5

नैचुरल हिस्ट्री म्यूजियम, सेक्टर- 10

म्यूजियम ऑफ इवोल्यूशन ऑफ लाइफ, सेक्टर- 10

हाई कोर्ट म्यूजियम, सेक्टर- 1

ली कार्बूजिए सेंटर, सेक्टर- 19

रैग डॉल म्यूजियम, सेक्टर- 1, रॉक गार्डन

यह कहना है लोगों का

सबके बारे में नहीं पता

 स्कूली दिनों में सेक्टर-10 और सेक्टर-23 के म्यूजियम में गई थी। बाकि के बारे में मुझे नहीं पता। मेरे अनुसार म्यूजियम को प्रमोट करेंगे तभी अवेयरनेस बढ़ेगी। इसके लिए वॉलंटियर हो जो हैरिटेज के बारे में अवेयर करें।  सुरभि सूद, सेक्टर-38

अवेयरनेस की कमी

 सिर्फ दो ही म्यूजियम के बारे में जानती हूं और एक ही बार गई हूं। शहर में और भी म्यूजियम होंगे। इस तरफ कभी ध्यान गया ही नहीं। यह अवेयरनेस की कमी है। अगर बताया जाएगा कि कहां क्या है तो इंट्रेस्ट खुद ब खुद बनेगा।  साधना, सेक्टर-18

बेटे को बताना मकसद

 शादी के बाद मुंबई शिफ्ट हो गई। जितना समय चंडीगढ़ में रही मैंने म्यूजियम नहीं देखा। आज पहली बार अपने बेटे के साथ सेक्टर-10 के म्यूजियम आई हूं। क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि जो बातें मैंने मिस की वो मेरे बेटा भी करेंे।  डॉ. वीनू, सेक्टर-38

टीचर के कहने पर आए

 जब आर्ट कॉलेज में एडमिशन लिया तो टीचर्स ने कहा कि चंडीगढ़ जाओगे तो म्यूजियम जरूरी जाना। क्योंकि एक आर्टिस्ट को सभी जगहों की हैरिटेज के बारे में जागरूक होना चाहिए।  कृति कौशल, राजस्थान

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