शहर के ऐसे बहुत से लोग जो सोशल वर्क कर रहे हैं या फिर उन्होंने ऐसी मिसाल कायम की है, जो दूसरों के लिए प्रेरणादायक है। मेरा मानना है कि ऐसे लोग किसी फूल से कम नहीं होते। इसलिए शहर के ऐसे ही कुछ फूलों को चुनकर मैंने उनके बारे में आर्टिकल लिखा और अब इन सबको मिलाकर किताब के रूप में गुलदस्ता बनाया। अपनी किताब गुलदस्ता के बारे में ऐसा ही बोलीं पारूल शर्मा रूपल। शनिवार को सेक्टर-27 के प्रेस क्लब में संवाद- साहित्य मंच व भंडारी अदबी ट्रस्ट की ओर से कार्यक्रम हुआ। इसमें इस किताब का विमोचन हुआ और काव्य गोष्ठी भी हुई। किताब में शहर के कितने लोग हैं? आपने चुनाव किस तरह से किया? इस बारे में पारूल बोली- कुछ लोगों को मैं जानती थी और कई लोगों के बारे में दूसरों से पता किया। सब के घर गई। इनका इंटरव्यू लिया। मेरा मकसद यही था कि दूसरे लोगों को एक तो इनके बारे में पता चले और इनसे वे मोटिवेट भी हों। किताब में 17 लोग हैं। इनमें होम्योपैथी डॉक्टर केके धीमान, प्रकाश चंद सूरी, अनुराधा अग्रवाल, डॉ. एसके शर्मा, पदश्री स्वर्गीय नेकचंद आदि शामिल हैं।
सीनियर सीटिजन पर लिखती
पारूल बताती हैं- मैंने 1992 से लिखना शुरू किया। तब मैं कॉलेज में थी। यह मेरी पहली किताब है। मुझे शुरू से ही सीनियर सीटिजन, वुमन और देश पर लिखना पसंद है।
काव्य गोष्ठी भी हुई
कार्यक्रम में काव्य गोष्ठी भी हुई। इसमें ट्राईसिटी के कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाई। इन कवियों में शशि प्रभा, दलजीत कौर, प्रेम विज, वीणा ढींगरा, कंचन भल्ला, अरुण बेताब, आदि शामिल रहे।