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एक आइडल वर्कआउट के बराबर होता है बोलिंग करना

3 वर्ष पहले
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‘बोलिंग’ की बात होते ही ख्याल आता है बल्लेबाजी और गेंदबाजी का। लेकिन यहां बात हो रही है 10 पिन बोलिंग की। जहां स्टेप लैडर फॉर्मेट में रखी पिन्स को गिराना होता है। एलान्ते के गेमिंग जोन स्मैश चंडीगढ़ में इसी टास्क को पूरा किया स्पोर्ट्स लवर्स ने। दरअसल, यहां पंजाब का सबसे बड़ा बोलिंग टूर्नामेंट-2018 कराया गया। इसमें नॉर्थ से 500 पार्टिसिपेंट्स हिस्सा रहे। उनमें 36 पार्टिसिपेंट्स शाॅर्टलिस्ट हुए। उसके बीच बोलिंग मैच हुआ। उसमें से बारह लोग सिलेक्ट हुए। उसके बाद आखिरी नाॅकआउट मैच हुआ। बोलिंग कर अपने टैलेंट का परिचय दिया। स्टेप लैडर फॉर्मेट में पिन डाली। इस टूर्नामेंट को चंडीगढ़ के रियल एस्टेट के गुरसेवक ने जीता। शहर के विपुल पहले रनरअप बने। लुधियाना के अंकुश सैकेंड रनरअप। इन तीन विनर्स को सम्मानित किया गया। बातचीत में तीनों पार्टिसिपेंट्स ने अपने बोलिंग के अनुभव बताए।

अंकुश बोले- पहले प्रेक्टिस किया करता था। यहां आने से पहले क्रिकेट और चेस खेलता था। अब बोलिंग करता हूं। यह पैशन बना और तय किया कि इसमें आगे जाना है। पहले थोड़ा भारी साबित हुआ। क्योंकि ट्रैक स्लिपरी था। मगर धीरे-धीरे इसकी आदत हो गई।

विपुल चार साल से बोलिंग कर रहे हैं। बताते हैं, क्रिकेट और बेसबॉल में स्टेट लेवल प्लेयर रहा हूं। सॉफ्टबॉल का पिचर हूं। इसलिए बोलिंग को पकड़ने के अंदाज से वाकिफ हूं। जब मैंने इसे देखा तो सॉफ्टबाॅल का जुनून इससे रिलेट कर पाया। फायदा यह हुआ कि फिट रहने लगा। रेगुलर जो जिम में जोर लगा रहे हो और इस के तीन-चार राउंड खेलने से आइडल वर्कआउट हो जाता है। रनिंग व बाॅल पुलिंग से नवर्स, मसल की एक्साइज होता है।

Bowling Tournament

एलान्ते के गेमिंग जोन स्मैश में बोलिंग टूर्नामेंट 2018 हुआ। इसमें पार्टिसिपेंट विनर्स को सम्मानित किया गया।

चार साल से बोलिंग कर रहा हूं

गुरसेवक कहते हैं- बोलिंग को मैंने पंद्रह साल पहले देखा। तब मैं टीनएजर था और विदेश छुट्‌टी के लिए गया था। वहीं बोलिंग को देखा और मेरा आकर्षण बढ़ा। तभी से इसका फैन हो गया। उसके पांच साल बाद दिल्ली में पहली बार बोलिंग की। उसके बाद यहां से खास दिल्ली बोलिंग के लिए जाया करता था। इससे मेरी बोलिंग की चाहत और गहरी होती गई। बोलिंग खेलने से इंसान बेहतर होता जाता है। यह फिटनेस के लिए अच्छी है। जितना हम इसे करते हैं उतना बेहतर होते चले जाते हैं। कोर वर्कआउट होता है। हाथों में स्ट्रेंथ बढ़ती है। साथ ही नसें एक्टिव रहती हैं। अबतक यहां लगातार तीन टूर्नामेंट जीत चुका हूं। इसमें टेक्नीक और हुक काफी मायने रखता है। क्योंकि हुक बॉल को घुमाने की एक कला है। इससे ही बॉल स्पिन होती है।

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