द स्टोरी ऑफ कैनवास में सेशन के साथ की पेंटिंग्स डिस्प्ले
जब आर्टिस्ट अपनी पेंटिंग को खत्म करता है उसके बाद ही उसे देखने की कहानी शुरू होती है। भले ही पेंटिंग एक हो, मगर उसे देख रहे हर इंसान का नजरिया अलग-अलग मिलेगा। कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ द स्टोरी ऑफ कैनवास एग्जिबीशन में। पंचकूला के कदंब आर्ट्स स्टूडियो में तीन दिवसीय ग्रुप एग्जिबीशन लगाई गई। इसमें शहर के साथ - साथ देश के दस शहराें से 50 आर्टिस्ट्स ने हिस्सा लिया। उन्होंने अपनी क्रिएटिविटी के रंगों को पेंटिंग्स से डिस्प्ले किया। वह भी अलग मीडियम व थीम्स के साथ। आर्टिस्ट नीनू विज ने इस एग्जिबीशन को क्यूरेट किया। उन्होंने इसे द स्टोरी ऑफ कैनवास से ट्विस्ट दिया। एक ओर पार्टिसिपेंट आर्टिस्ट के आर्टवर्क को डिसप्ले हुए, दूसरी ओर उन्हीं आर्ट वर्क पर युवा आंत्रप्रिन्योर काव्या अत्रे व महर वडेरा के साथ स्टोरी टेलिंग सेशन रखा गया। जिंदगी, सोसाइटी व पोएट्री से जुड़ी चीजों को बयां किया।
क्यूरेटर नीनू विज बताती हैं- हमारा आइडिया था कि आर्ट पर लोग बात करें। लोगाें की रुचि बढ़े। इसलिए यह कंसेप्ट क्रिएट किया। जब भी हम किसी आर्टवर्क को देखते हैं तो मन में एक खयाल आता है। फिर चाहे वो उसे बनाने वाला हो या फिर देखने वाला। चार से पांच लोग अगर एक पेंटिंग को देखते हैं तो हर किसी का अलग नजरिया मिलेगा। अगर उन्हीं देखने वालों को थोड़ा आर्ट फील्ड से जुड़ा एक्सपर्ट कुछ बताता है तो उन्हें उसमें दर्शायी गई बातें समझने में मदद मिलती है। वह चीजों को खुद से रिलेट कर पाते हैं। इसलिए एग्जिबीशन को इस तरीके से रोचक बनाया है।
कदंब आर्ट्स स्टूडियो में तीन दिवसीय एग्जिबीशन लगाई गई।
काव्या व मेहर की नजर में पेंटिंग्स
थिएटर आर्टिस्ट व आंत्रप्रिन्योर काव्या अत्रे ने पेंटिंग रिफ्लेक्टिंग क्लाउड्स को रंग व सोच से जोड़ा। उन्होंंने पेंटिंग में मौजूद बादलों के उलझाव और हरियाली को दो लोगों को मोनो-लॉग के जरिए व्यक्त किया। युवक और युवती की वेदनाओं को कविता से कहा। इसके साथ ही पेंटिंग से न मिटने वाले एहसास को बयां किया। आर्टिस्ट मेहर वडेरा ने पेंटिंग व्हील और लाइफ को अपनी जिंदगी से जोड़ते हुए बात की।