मैट्रीमोनियल में लिखीं दो शर्तें, इंसानियत और बहन हो साथ
हर लड़की को अपना जीवन साथी चुनने का अधिकार है। उसमें क्या खूबी होनी चाहिए यह बताने का हक उसे होना चाहिए क्योंकि पूरी जिंदगी उसे उसके साथ बितानी होती है। सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर मेंं नाटक मैट्रीमोनियल मंचित हुआ। मोहिंदर रिश्म के लिखे नाटक का निर्देशन संगीता गुप्ता ने किया। इसे रूपक कला एंड वेलफेयर सोसायटी ने पेश किया। नाटक की कहानी अनंता, उसकी मां के इर्द- गिर्द घूमती है। अनंता 35 साल की हैं और 10 साल से अखबार में ऐड दे रही है। फिर भी उसके लड़का नहीं मिलता। क्योंकि शादी की ऐड में दो शर्त भी लिखी होती हैं। पहली- लड़के में इंसानियत होनी चाहिए और दूसरी- लड़के की बहन होनी चाहिए।
Stage Play
टैगोर थिएटर मिनी ऑडिटोरियम में नाटक मैट्रीमोनियल मंचित हुआ।
कहानी भी और पोएट्री भी|नाटक में तीन किरदार रहे, जो कहानी से नाटक को आगे बढ़ा रहे थे। निर्देशक ने कहानी के साथ पोएट्री को पिरोया, जो न केवल सिचुएशन के मुताबिक रहे बल्कि कहानी को आगे भी बढ़ा रहे थे। सेंटर में सैट शादी के मंडप जैसा डिजाइन किया। बाकी सैट घर के रूम जैसा था।