पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • कान में दिखाई गई शॉर्ट फिल्म अस्मद को फीचर फिल्म की तरह डिजाइन किया

कान में दिखाई गई शॉर्ट फिल्म अस्मद को फीचर फिल्म की तरह डिजाइन किया

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
ऐसे मौके बहुत कम होते हैं जब किसी शॉर्ट फिल्म का पूरा साउंड ट्रैक एक साथ रिलीज हो। पर सिटी बेस्ड अवॉर्ड विनिंग शार्ट फिल्म अस्मद के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। यह फिल्म 2016 में कान शॉर्ट फिल्म कॉर्नर का हिस्सा रह चुकी है। कान के अलावा ये फिल्म 40 नेशनल व इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स तक पहुंच चुकी है। इनमें इसे बेस्ट पिक्चर, डायरेक्टर, सिनेमेटोग्राफी, साउंड डिजाइन और म्यूजिक के अवॉर्ड मिल चुके हैं। बुधवार को गवर्नमेंट म्यूजियम के ऑडिटोरियम में बड़े स्तर पर फिल्म व थिएटर एक्टर आदिल हुसैन की मौजूदगी में पब्लिक स्क्रीनिंग के साथ-साथ इसका साउंड ट्रैक रिलीज हुआ। इस मौके पर फिल्म की पूरी टीम मौजूद थी। इनमें फिल्म के राइटर व डायरेक्टर प्रभजीत धमीजा, एसोसिएट डायरेक्टर अभिषेक गर्ग, म्यूजिक कंपोजर व म्यूजिक प्रोड्यूसर जेरी एस विंसेंट, एक्टर्स अनिकेत मल्होत्रा व एधा सिंगला, लिरिक्स राइटर लतिका कालरा शामिल हैं। 30 मिनट की इस फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद पूरी टीम के साथ इंटरेक्शन हुआ।

बुधवार को सेक्टर-10 स्थित गवर्नमेंट म्यूजियम के ऑडिटोरियम में सिटी बेस्ड अवॉर्ड विनिंग शार्ट फिल्म अस्मद की पब्लिक स्क्रीनिंग के साथ-साथ साउंड ट्रैक रिलीज हुआ।

अभिषेक गर्ग, लतिका कालरा, एधा सिंगला, प्रभजीत धमीजा, अनिकेत मल्होत्रा और जेरी एस विंसेंट। फोटो: भास्कर

खुद को खोजने की कहानी है अस्मद

प्रभजीत और अभिषेक वैसे तो इंजीनियर हैं। लेकिन अब पूरी तरह फिल्म मेकिंग में आ गए हैं। प्रभजीत ने कहा- अस्मद के सफर की शुरुआत 2014 में हुई थी। एनएफडीसी लैब में इसकी स्क्रिप्ट जब सिलेक्ट हुई तो इस फिल्म के बारे में गंभीरता से सोचा। बोले- हम सबके लिए ये पहली इंडिपेंडेंट फिल्म थी। अस्मद का संस्कृत शब्द है, मैं या मुझे। अपने आप की खोज। हिमाचल में पालमपुर के नजदीक शूट हुई इस फिल्म की कहानी 13 साल के लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक घटना के लिए खुद को जिम्मेदार समझता है। इसे फीचर फिल्म की तरह डिजाइन किया है। बोले- इस फिल्म की क्राउड फंडिंग भी कान से लौटने के बाद हुई। अब मेरी फीचर फिल्म ‘कठपुतली’ बनकर तैयार है। इसकी कहानी मैंने लिखी है और इसे डायरेक्टर भी मैंने किया है। इसमें कोई नामी कास्ट नहीं है। पर अब लगता है कि अपनी फिल्मों को दूसरों तक पहुंचाने के लिए नामी चेहरों का फिल्म में होना जरूरी है।

सभी को मिली दिशा|अभिषेक ने कहा- जैसा कि फिल्म के नाम से जाहिर है। खुद की खोज और अपने रास्ते खुद बनाना। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान 80 प्रतिशत क्रिउ मेंबर्स को अपने करिअर के लिए दिशा मिली। उन्होंने बताया- अब वे एक म्यूजिकल डॉक्युमेंट्री पर काम कर रहे हैं।

मैं ऑस्कर के बारे में सोचूंगा तो आगे कैसे बढ़ूंगा- जेरी एस विंसेंट

इस फिल्म का साउंड ट्रैक इसलिए खास है क्योंकि इसमें 8 बैकग्राउंड स्कोर ट्रैक्स और एक बोनस सॉन्ग है, जिन्हें एआर रहमान के म्यूजिक प्रोड्यूसर जेरी सिल्वेस्टर विंसेट ने कंपोज किया है। प्रभजीत ने बताया- पहले फिल्म में नेचुरल म्यूजिक रखना था। पर जब म्यूजिक करने वाले आशीष और जेरी साथ जुड़े तो इसपर बड़े स्तर पर काम शुरू किया। जेरी बोले - हम तो बैकग्राउंड स्कोर तैयार कर रहे थे। दो थीम पर काम कर चुके थे और तीसरा थीम नहीं मिला तो टाइटल गीत पर काम शुरू किया। नौ महीने इसके लिरिक्स लिखने में लगे। इस फिल्म के बारे में एक काॅमन फ्रेंड से पता चला। पहले इस फिल्म की साउंड क्रैक की। कहानी सुनकर ही संगीत की इमेजिनेशन कर उसे तैयार किया। बोले- ऐसी फिल्मों में रेग्युलर फिल्मों से हटकर काम करना पड़ता है। इनमें खुद को ओवर प्रोड्यूस करने से रोकना पड़ता है ताकि म्यूजिक दृश्यों पर भारी न पड़े। जेरी ने कहा- बचपन से ही उन्हें म्यूजिक का शौक था। पेरेंट्स से इसके बारे में बात की तो बोले पहले ग्रेजुएशन करो। इसके बाद अमरीकन प्यानो प्लेयर सुजान और इटेलियन कंपोजर से संगीत की बारीकियां और तकनीकियां सीखीं। 2010 में इस इंडस्ट्री में कदम रखा। एआर रहमान के साथ काम करके खुद से खुद की उम्मीदें भी बढ़ जाती हैं। पर बहुत कुछ सीखने को भी मिलता है।

खबरें और भी हैं...