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कमर्शियल होने का मतलब ये नहीं कि चीप हो जाओ ...

3 वर्ष पहले
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आरती एम अग्निहोत्री | चंडीगढ़

यह तो हमेशा से ही है कि गीत लिखने वाले से ज्यादा गाने वाले को नाम और शोहरत मिलती है। जबकि शायर हमेशा से ही गायक से बड़ा रहा है। गायक कितना ही सुरीला क्यों न हो, कंपोजीशन भी कितनी ही अच्छी क्यों न हो। कई गीतकार ऐसे हैं जिनके गीत गाकर हिट हुए सिंगर्स ने करोड़ों रुपए कमाकर कोठी और महल खड़े कर लिए। पर गीतकारों को उनके गीतों की वाजिब कीमत तो दूर, नाम भी नहीं मिला जितना वो डिजर्व करते हैं। ये समझना होगा कि बोल के बिना गायक और संगीत, दोनों ही गूंगे हैं। यह कहना है गीतकार व गायक गुरबिंदर सिंह मान का। बोले- म्यूजिक के रिएलिटी शोज में जो भी गीत गाया जाए, उसके गीतकार का नाम भी वहां बताना चाहिए। इससे वो प्रमोट होगा। गुरबिंदर सिंह के लिखे गीतों को नछत्तर गिल, ऐमी विर्क, एक्टर करमजीत अनमोल, हरदेव माही गिल और इंदरजीत निक्कू सहित कई सिंगर्स गा चुके हैं। नछत्तर गिल द्वारा गाया इनका लिखा गीत- झूठी है तू झूठी है, सच्ची नहीं, हरदेव माही गिल द्वारा गाया- पहले प्यार दी पहली मुलाकात, ऐमी विर्क द्वारा फिल्म मंजे बिस्तरे में गाया गीत- वेख के हसदी ए काफी हिट हुए हैं।

पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में इन दिनों आ रहे गीतों पर गुरबिंदर ने कहा- कुछ लोग ये कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं कि हम लोगों को वही सुना रहे हैं जो वो सुनना चाहते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। हम संगीत को रूह की खुराक मानते हैं। रूह की भूख मिटाने के लिए हम इसे सुनते हैं। उसी तरह पेट की भूख मिटाने के लिए हम खाना खाते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर हमें बहुत तेज भूख लगी है और कोई हमें बर्गर परोस रहा है, तो हम खाएंगे ही। कोई हेल्दी फूड परोसेगा तो वो खाएंगे। कमर्शियल गाने का मतलब ये नहीं कि उसके बोल चीप हों। दूसरी ओर दुख की बात ये है कि बुरे गीतों को हमारा यूथ जल्दी प्रमोट करता है। जबकि किसी अच्छे गीत को न लाइक मिलते हैं और न शेयर। वो दबा रह जाता है। कलाकारों को एका करना होगा कि हिंसा या शराब को प्रमोट करने वाले गीत न गाएं। उन गीतों के मार्केट में आने का नतीजा ही है जो मैरिज पैलेस में गोलियां चलीं और बेकसूर मारे गए।

शिव कुमार बटालवी से हैं प्रेरित

गुरबिंदर तरन तारन से हैं और अब मोहाली में रहते हैं। बताते हैं- स्कूल टाइम से कई शायरों को पढ़ा पर शिव कुमार बटालवी उनके फेवरेट रहे हैं। कम उम्र में इतने दर्द को उन्होंने करीब से देख लिया। अपनी लेखनी में ठेठ शब्दों को तरजीह दी और अपने दर्द को ऐसे बयां किया कि दर्द से ही प्यार हो जाए। आज के समय में ऐसा कोई नहीं कर सकता। 2003 में इनकी पहली एलबम-दिलां वाली गल मार्केट में आई। इसके बाद अब तक इनके गाए और लिखे कई गीत मार्केट में आ चुके हैं।

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